ईरान में उबाल: तेहरान से लेकर अन्य शहरों तक प्रदर्शनकारियों का हुजूम, इंटरनेट ब्लैकआउट के बावजूद नहीं थम रहा आंदोलन!

ईरान में आर्थिक संकट से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब पूरे देश में फैल चुका है। राजधानी तेहरान से लेकर मशहद, इस्फ़हान, शिराज और अन्य शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में प्रदर्शनकारी “डेथ टू डिक्टेटर” (तानाशाह मुर्दाबाद) और “डेथ टू इस्लामिक रिपब्लिक” जैसे नारे लगा रहे हैं। यह आंदोलन दिसंबर 2025 के अंत में तेहरान के ग्रैंड बाज़ार में व्यापारियों की हड़ताल से शुरू हुआ था, जब ईरानी रियाल की कीमत रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिर गई। अब यह राजनीतिक हो चुका है, जहां लोग सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की सत्ता के खिलाफ खुलेआम बोल रहे हैं।
9 जनवरी 2026 तक यह प्रदर्शन 12वें दिन में प्रवेश कर चुका है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, सभी 31 प्रांतों में 340 से ज्यादा प्रदर्शन हुए हैं, जिनमें 100 से अधिक शहर शामिल हैं। तेहरान में रात के समय सड़कें ब्लॉक कर दी गईं, सरकारी इमारतों और वाहनों में आग लगाई गई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस और IRGC (इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) के साथ झड़पें कीं। निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी के आह्वान पर 8 जनवरी की शाम बड़े प्रदर्शन हुए, जिसके बाद सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट ब्लैकआउट लगा दिया और अंतरराष्ट्रीय फोन लाइनें काट दीं। इससे प्रदर्शनकारियों की координация मुश्किल हो गई, लेकिन छिटपुट वीडियो अभी भी बाहर आ रहे हैं।
आर्थिक कारण मुख्य हैं: मुद्रास्फीति 40% से ऊपर, रियाल का मूल्य गिरकर 14 लाख प्रति डॉलर के आसपास, दवाइयां और बुनियादी सामान महंगे हो गए। लेकिन नारे राजनीतिक हैं – कुछ जगहों पर “शाह जिंदाबाद” और पहलवी की वापसी के नारे भी लगे। सुरक्षा बलों ने गोलीबारी की, जिससे कम से कम 36-45 प्रदर्शनकारी मारे गए (कई बच्चे शामिल), 2200 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुईं। कुछ सुरक्षा कर्मी भी मारे गए। अस्पतालों पर छापे मारे गए ताकि घायलों का इलाज रोका जाए।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों पर गोली चली तो कड़ा जवाब दिया जाएगा। मानवाधिकार संगठन जैसे एमनेस्टी और HRANA ने दमन की निंदा की है। यह 2022-23 के “वुमन, लाइफ, फ्रीडम” आंदोलन के बाद सबसे बड़ा चुनौती है। कुर्द क्षेत्रों में हड़ताल के आह्वान हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक संकट और दमन से रिजीम की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन अभी रिजीम चेंज की स्थिति नहीं बनी है। आने वाले दिन निर्णायक होंगे, खासकर जुमे की नमाज के बाद। ईरानी लोग आजादी की मांग कर रहे हैं, दुनिया उनकी आवाज सुन रही है।
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