जल्द से जल्द “स्वार्थी महिला” को तलाक दूंगा – प्रतीक यादव

समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के परिवार में एक बार फिर राजनीतिक और पारिवारिक विवाद सुर्खियों में आ गया है।

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मुलायम के छोटे बेटे प्रतीक यादव ने अपनी पत्नी अपर्णा यादव से तलाक देने का ऐलान कर दिया है। यह घोषणा उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट के माध्यम से की, जो तेजी से वायरल हो रही है।

प्रतीक यादव ने पोस्ट में अपर्णा पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें स्वार्थी करार दिया है और लिखा है कि वह उनके पारिवारिक रिश्तों को बर्बाद करने वाली साबित हुई हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वे जल्द से जल्द इस “स्वार्थी महिला” को तलाक देंगे। पोस्ट में प्रतीक ने अपनी मानसिक स्थिति को बहुत खराब बताया है और आरोप लगाया कि अपर्णा को उनकी कोई परवाह नहीं, क्योंकि वह केवल अपनी प्रसिद्धि और प्रभाव बढ़ाने में लगी रहती हैं। उन्होंने यहां तक लिखा कि उन्होंने कभी इतनी “बुरी आत्मा” नहीं देखी और दुर्भाग्य से उनकी शादी इसी से हो गई।
यह घटना मुलायम परिवार की आंतरिक कलह को फिर से उजागर कर रही है, खासकर इसलिए क्योंकि अपर्णा यादव भाजपा की नेता हैं और वर्तमान में उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष के पद पर हैं। प्रतीक और अपर्णा की शादी 2012 में हुई थी और उनके दो बच्चे हैं।सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इस पोस्ट को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। फिलहाल अपर्णा यादव की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह घटना यादव परिवार के भीतर चल रहे तनाव को एक बार फिर सबके सामने ला खड़ा कर रही है।
मुलायम सिंह यादव के परिवार में पुराने विवाद मुख्य रूप से राजनीतिक उत्तराधिकार, पार्टी नियंत्रण और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से जुड़े रहे हैं। मुलायम सिंह यादव के निधन (2022) से पहले और बाद में भी परिवार की आंतरिक कलह सुर्खियों में रही है।
अखिलेश यादव अपने भाईयों के साथ
यहां प्रमुख पुराने विवादों का संक्षिप्त इतिहास है:

1. अखिलेश यादव vs शिवपाल यादव का प्रमुख विवाद (2012-2018)

  • 2012 में मुलायम सिंह ने अपने बड़े बेटे अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया, जबकि मुलायम यादव के छोटे भाई शिवपाल यादव खुद को उत्तराधिकारी मानते थे और पार्टी में नंबर-2 की भूमिका निभा रहे थे।
  • इससे परिवार दो खेमों में बंट गया: एक तरफ अखिलेश , दूसरी तरफ मुलायम और शिवपाल।
  • 2016 में विवाद चरम पर पहुंचा: अखिलेश ने शिवपाल के करीबियों को कैबिनेट से हटाया, मुलायम ने अखिलेश को पार्टी से निकाला (बाद में वापस लिया) और शिवपाल ने 2018 में अलग पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) बनाई।
  • इस फूट से समाजवादी पार्टी को 2017 विधानसभा चुनाव में भारी नुकसान हुआ, और भाजपा की जीत आसान हो गई।

2. अपर्णा यादव का भाजपा में जाना (2022)

  • मुलायम के छोटे बेटे प्रतीक यादव की पत्नी अपर्णा यादव (जो पहले सपा में सक्रिय थीं) ने 2022 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा जॉइन कर लिया।
  • यह फैसला परिवार में तनाव का कारण बना, क्योंकि अपर्णा ने सपा छोड़कर भाजपा के लिए प्रचार किया। बाद में वे यूपी राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष बनीं।
  • यह घटना परिवार की एकता पर सवाल उठाने वाली थी, खासकर जब मुलायम बीमार थे।

3. अन्य पुराने विवाद

  • अमर सिंह का प्रभाव: मुलायम के करीबी अमर सिंह पर परिवारवाद और पार्टी में बाहरी हस्तक्षेप के आरोप लगे, जिससे अखिलेश और शिवपाल के बीच खाई बढ़ी।
  • आय से अधिक संपत्ति मामला: मुलायम, अखिलेश और परिवार के कई सदस्यों पर CBI जांच हुई, जिसमें संपत्ति के स्रोत पर सवाल उठे।
  • पारिवारिक संपत्ति और राजनीतिक पदों का बंटवारा: परिवार के कई सदस्य (जैसे धर्मेंद्र यादव, अक्षय यादव, आदित्य यादव) राजनीति में हैं, लेकिन पदों और टिकटों को लेकर अक्सर असंतोष रहा।

वर्तमान स्थिति (2026 तक)

  • मुलायम के निधन के बाद विवाद कम हुए हैं। शिवपाल यादव वापस सपा में लौट आए, और अखिलेश पार्टी की कमान संभाल रहे हैं।
  • हालिया घटना (जनवरी 2026): प्रतीक यादव ने अपर्णा से तलाक का ऐलान किया, जो परिवार की नई कलह का संकेत है, लेकिन पुराने विवादों जितना बड़ा राजनीतिक प्रभाव नहीं।

मुलायम परिवार की राजनीति में परिवारवाद हमेशा चर्चा का विषय रहा है, जहां सत्ता और विरासत की लड़ाई ने कई बार पार्टी को कमजोर किया।

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