हिंदुओं के बाद अब बांग्लादेश में ईसाई समुदाय क्यों सहमा हुआ है?

बांग्लादेश में 2024 में शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी है, जिससे धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले तेज हो गए हैं। पहले हिंदू समुदाय मुख्य निशाने पर था, लेकिन अब ईसाई समुदाय भी गहरे डर में जी रहा है। देश की आबादी में ईसाई सिर्फ 0.5% हैं, ज्यादातर कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट, लेकिन हाल की घटनाओं ने उन्हें असुरक्षित बना दिया है।2024 अगस्त के बाद से कट्टरपंथी समूहों ने अराजकता का फायदा उठाकर अल्पसंख्यकों पर हमले किए। ओपन डोर्स जैसे संगठनों की रिपोर्ट्स के अनुसार, इस्लाम से धर्मांतरित ईसाइयों पर सबसे ज्यादा दबाव है – घर जलाए गए, चर्चों पर हमले हुए और जबरन धर्म परिवर्तन की कोशिशें हुईं।
2025 में वर्ल्ड वॉच लिस्ट में बांग्लादेश 24वें स्थान पर है, जहां ईसाई उत्पीड़न बढ़ा है।हाल की घटनाएं और डरावनी हैं। नवंबर 2025 में ढाका के कैथेड्रल और कैथोलिक स्कूल पर क्रूड बम हमले हुए। दिसंबर में कई चर्चों और व्यक्तियों को “तौहीदी मुस्लिम जनता” के नाम से धमकी भरे पत्र मिले, जिनमें धर्मांतरण बंद करने की चेतावनी दी गई। क्रिसमस 2025 से पहले ईसाई नेताओं ने अंतरिम सरकार से सुरक्षा की मांग की, क्योंकि वे सामान्य से ज्यादा डरे हुए हैं। पुलिस ने वादा किया है कि चर्चों पर विशेष सुरक्षा होगी, लेकिन न्याय की कमी से डर बना हुआ है।यह डर सिर्फ ईसाइयों तक सीमित नहीं।
हिंदू-बौद्ध-ईसाई यूनिटी काउंसिल के अनुसार, अगस्त 2024 से जुलाई 2025 तक अल्पसंख्यकों पर 2,442 हमले हुए, जिनमें मंदिर और चर्च दोनों शामिल हैं। अंतरिम सरकार पर आरोप है कि वह कट्टरपंथियों पर कार्रवाई नहीं कर रही। आगामी चुनावों से पहले हिंसा बढ़ने की आशंका है, जिससे ईसाई समुदाय छिपकर प्रार्थना कर रहा है।अंतरराष्ट्रीय संगठन जैसे USCIRF और ओपन डोर्स चिंतित हैं। वे कहते हैं कि कानून-व्यवस्था की कमी और दंडहीनता से अल्पसंख्यक असुरक्षित हैं। ईसाई नेता प्रार्थना कर रहे हैं कि शांति बहाल हो, लेकिन फिलहाल डर का माहौल है। बांग्लादेश की विविधता बचाने के लिए तत्काल कार्रवाई जरूरी है।
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