अमेरिका का ‘पुराना पाप’ फिर चर्चा में, भारतीय सेना ने 1971 की याद दिलाई, क्या बदलेगा India-US समीकरण?

India-America Relations:  भारत और अमेरिका के रिश्तों में गहराती तल्खी के बीच भारतीय सेना की एक पुरानी लेकिन सोचने पर मजबूर कर देने वाली पोस्ट ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। 5 अगस्त 2025 को भारतीय सेना की ईस्टर्न कमांड ने एक ऐतिहासिक तथ्य साझा किया कि 1954 से 1971 के बीच अमेरिका ने पाकिस्तान को दो अरब डॉलर (लगभग 17,500 करोड़ रुपये) के हथियार भेजे थे। यह वही समय था जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव अपने चरम पर था और दिसंबर 1971 में भारत ने पाकिस्तान को हराकर बांग्लादेश को जन्म दिया था।

भारतीय सेना ने ‘This Day That Year’ नामक सीरीज़ के तहएक पुराने अखबार की कटिंग साझा की, जिसमें कैप्शन में लिखा था: “U.S. Arms Worth $2 Billion Shipped to Pakistan Since ‘54”इसमें हैशटैग #KnowFacts और #VijayVarsh का भी प्रयोग किया गया।

विशेषज्ञ इसे अमेरिकी नीतियों पर भारत का एक ‘सॉफ्ट डिप्लोमैटिक रिमाइंडर’ मान रहे हैं। यह पोस्ट ऐसे समय में आई है जब अमेरिका एक बार फिर पाकिस्तान को सैन्य सहायता देने की योजना बना रहा है, जबकि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग पहले से मज़बूत होता जा रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणी के बाद पोस्ट का समय सवालों में

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत-रूस संबंधों पर टिप्पणी करते हुए भारत की विदेश नीति की आलोचना की थी। जवाब में यह पोस्ट यह दर्शाती है कि भारत अपने ऐतिहासिक अनुभवों को नहीं भूला है।

विशेष रूप से 1971 के युद्ध में अमेरिका द्वारा USS Enterprise नामक विमानवाहक पोत को हिंद महासागर भेजना भारत के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा गया था। इसके जवाब में भारत ने सोवियत संघ के साथ अपनी सैन्य साझेदारी को मजबूत किया था।

क्या भारत अब और सख्त विदेश नीति अपनाएगा?

भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखता है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, सेना की यह पोस्ट न सिर्फ इतिहास को याद दिलाती है बल्कि यह संदेश भी देती है कि अमेरिका की ‘डुअल पॉलिसी’ को भारत नजरअंदाज नहीं करता।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में क्या संकेत है इस पोस्ट का?

यह पोस्ट ऐसे समय में आई है जब भारत और अमेरिका के रिश्ते सामरिक रूप से तो मजबूत हो रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान को लेकर दोनों के दृष्टिकोण में अंतर है। ऐसे में भारतीय सेना द्वारा 1971 की याद दिलाना कूटनीतिक रूप से एक अहम इशारा माना जा रहा है कि अमेरिका को अपनी नीतियों की समीक्षा करनी चाहिए।

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