ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में बनेगा रेयर अर्थ मैग्नेट कॉरिडोर

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूनियन बजट 2026-27 पेश करते हुए भारत की रेयर अर्थ मिनरल्स में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में रेयर अर्थ मैग्नेट कॉरिडोर स्थापित करने का ऐलान किया।

यह कोरिडोर इन चार खनिज-समृद्ध राज्यों को जोड़ेगा, जहां तटीय क्षेत्रों में मोनाजाइट रेत से रेयर अर्थ एलिमेंट्स प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। इसका मुख्य उद्देश्य माइनिंग, प्रोसेसिंग, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है। इससे भारत चीन पर रेयर अर्थ मैग्नेट्स और संबंधित सामग्रियों की निर्भरता कम कर सकेगा, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, रिन्यूएबल एनर्जी और डिफेंस सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण हैं। नवंबर 2025 में लॉन्च की गई रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स स्कीम (7,280 करोड़ रुपये की) के बाद यह अगला बड़ा कदम है।

वित्त मंत्री ने कहा, “2025 नवंबर में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स की स्कीम शुरू की गई थी। अब हम ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों को समर्पित रेयर अर्थ कोरिडोर स्थापित करने में सहायता देने का प्रस्ताव रखते हैं, ताकि माइनिंग, प्रोसेसिंग, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिले।”

बजट में इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को और मजबूत करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के आवंटन को बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव किया गया है।

  • यह स्कीम 2025 में लॉन्च हुई थी और इसमें निवेश प्रतिबद्धताएं लक्ष्य से दोगुनी हो चुकी हैं।
  • बढ़ा हुआ बजट हाई-वैल्यू कंपोनेंट्स के आयात पर निर्भरता कम करने और सप्लाई चेन को मजबूत करने में मदद करेगा।
  • यह रेयर अर्थ मैग्नेट्स से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और EV सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण होगा।

यह घोषणा वैश्विक स्तर पर चीन की रेयर अर्थ सप्लाई में दबदबे के खिलाफ भारत की रणनीति का हिस्सा है। इन चार राज्यों में पहले से ही रेयर अर्थ रिजर्व्स हैं, और कोरिडोर से पूरी वैल्यू चेन (खनन से अंतिम उत्पाद तक) विकसित होगी। इससे हजारों रोजगार सृजन, तकनीकी विकास और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलेगा।

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