CBI ने तिरुपति लड्डू एडल्टरेशन केस में अपनी फाइनल चार्जशीट दाखिल की है। जांच में पाया गया कि 2019 से 2024 के बीच लड्डू प्रसाद बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए घी में बीफ टैलो या लार्ड बिल्कुल नहीं था। पहले के दावों (जैसे चंद्रबाबू नायडू के) के उलट, कोई एनिमल फैट नहीं मिला। इसके बजाय, घी को एडल्टरेट करने के लिए वेजिटेबल ऑयल्स और लेबोरेटरी एस्टर (chemical esters) का इस्तेमाल किया गया, जो घी के डेयरी पैरामीटर्स (जैसे फैट कंटेंट, स्मेल, टेक्सचर) को केमिकली नकल करते थे। यह सिंथेटिक तरीका था, जिससे घी जैसा दिखता था लेकिन असल में मिल्क-बेस्ड नहीं था।
Indian Express के अनुसार चार्जशीट के मुताबिक, यह एडल्टरेशन बड़े पैमाने पर हुआ, जिससे तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को भारी नुकसान हुआ। जांच में पुष्टि हुई कि सप्लाई चेन में फ्रॉड था, लेकिन सनसनीखेज “बीफ/पॉर्क फैट” वाले आरोप गलत साबित हुए। CBI ने इस मामले में आरोपी कंपनियों और अधिकारियों पर कार्रवाई की है।

खुलासा 2024 के उस विवाद को क्लोज करता है, जब एनिमल फैट के आरोपों ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई थी। अब फोकस सिंथेटिक एडल्टरेशन और फूड फ्रॉड पर है, जो स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक था। आर्टिकल में CBI की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि घी “केमिकल स्लज” जैसा था, लेकिन कोई एनिमल फैट नहीं।