दिल्ली : अब हफ्ते में 2 दिन वर्क फ्रॉम होम, सीएम के काफिले में भी बड़ी कटौती

राजधानी में पेट्रोल-डीजल की खपत और ट्रैफिक के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए दिल्ली सरकार ने एक बेहद सख्त और प्रभावी रणनीति तैयार की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में लिए गए इन फैसलों का सीधा असर सरकारी कार्यप्रणाली से लेकर आम जनता की लाइफस्टाइल पर पड़ने वाला है।

ईंधन बचाने की मुहिम की शुरुआत प्रशासन ने अपने घर से की है। अब दिल्ली सरकार के अधिकारियों के लिए हफ्ते में 2 दिन वर्क फ्रॉम होम (WFH) की व्यवस्था अनिवार्य कर दी गई है। इससे न केवल सड़कों पर सरकारी गाड़ियों का दबाव कम होगा, बल्कि ईंधन की भारी बचत भी होगी।

सादगी और बचत का उदाहरण पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने अपने ही काफिले पर कैंची चलाई है। अब सीएम के काफिले में लंबी-चौड़ी गाड़ियों की कतार नहीं दिखेगी। मुख्यमंत्री ने फैसला किया है कि उनके साथ सिर्फ 4 गाड़ियां ही चलेंगी, ताकि सरकारी खजाने पर ईंधन का बोझ कम किया जा सके।

सरकार ने दिल्ली की जनता से भी इस मुहिम का हिस्सा बनने की भावुक अपील की है। मुख्यमंत्री ने आग्रह किया है कि हर नागरिक महीने में कम से कम 1 दिन \’नो व्हीकल डे\’ मनाए। यानी महीने में एक दिन अपनी निजी गाड़ी छोड़कर पब्लिक ट्रांसपोर्ट या साइकिल का इस्तेमाल करें, जिससे प्रदूषण और तेल की खपत दोनों में कमी आए।

यह मुहिम सिर्फ सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं रहेगी। सरकार अब प्राइवेट कंपनियों और संस्थानों को भी इस अभियान से जोड़ने जा रही है। कंपनियों को सलाह दी जाएगी कि वे अपने कर्मचारियों को हफ्ते में 2 दिन वर्क फ्रॉम होम दें। लेबर विभाग को इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करने और इसे बढ़ावा देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि हमें दिल्ली की हवा और संसाधनों को बचाने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे। अगर हम आज ईंधन नहीं बचाएंगे, तो आने वाली पीढ़ी को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। यह बदलाव सिर्फ एक सरकारी आदेश नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन है।

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