पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब टीएमसी को लेकर एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने राज्य के सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। चुनाव में झटके के बाद अब पार्टी को अपने अस्थायी मुख्यालय ‘तृणमूल भवन’ को खाली करने का सख्त नोटिस मिल गया है।
कोलकाता के ईएम बाईपास के पास तोपसिया इलाके में स्थित इस बहुमंजिला आलीशान इमारत के मालिक मोंटू साहा ने टीएमसी नेतृत्व को दो महीने के भीतर बोरिया-बिस्तर समेटने को कह दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य की राजनीति में पहले से ही भारी उथल-पुथल मची हुई है।
यह आलीशान इमारत पिछले चार वर्षों से तृणमूल कांग्रेस की तमाम बड़ी सियासी रणनीतियों का मुख्य केंद्र रही है। पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी से लेकर महासचिव अभिषेक बनर्जी तक के लिए यहाँ आलीशान और विशेष कमरे बनाए गए थे। पार्टी की सभी बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस और रणनीतिक बैठकें यहीं से संचालित होती थीं।
इमारत के मालिक और राज्य की प्रसिद्ध कंपनी ‘मॉडर्न डेकोरेटर्स’ के प्रमुख मोंटू साहा ने इस फैसले के पीछे सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है। उन्होंने बताया चुनाव नतीजों के बाद 4 मई को इमारत के बाहर बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ और हिंसा हुई थी। अगर भविष्य में कोई बड़ा नुकसान होता है, तो उसकी जिम्मेदारी सीधे मुझ पर आएगी। इसी डर और सुरक्षा कारणों से मैंने पार्टी से इमारत खाली करने का अनुरोध किया है। इसके पीछे कोई राजनीतिक दबाव या रंजिश नहीं है। साहा ने यह भी साफ किया कि टीएमसी ने हमेशा समय पर किराया चुकाया है और पार्टी ने अगले दो महीनों में इस भवन को खाली करने का भरोसा भी दे दिया है।
दरअसल, साल 2021 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद टीएमसी ने अपने पुराने मुख्यालय को गिराकर नए आधुनिक ढांचे के निर्माण का फैसला किया था। इसी वजह से साल 2022 में तोपसिया की यह इमारत किराए पर ली गई थी। शुरुआत में यह समझौता सिर्फ दो साल के लिए था, लेकिन निर्माण कार्य खिंचने की वजह से इसकी अवधि बढ़ानी पड़ी थी।
पिछले चार सालों में प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी और उपाध्यक्ष जय प्रकाश मजूमदार की देखरेख में चलने वाला यह भवन टीएमसी का पावर सेंटर बन चुका था, जहाँ रोज़ मंत्रियों और विधायकों का जमावड़ा लगता था। इस नोटिस के बाद बंगाल की राजनीति में अटकलों का बाज़ार गर्म हो गया है। विपक्ष ने इसे हाथों-हाथ लेते हुए दावा किया है कि यह तृणमूल के कमजोर होते राजनीतिक प्रभाव और ढहते साम्राज्य का सीधा सबूत है।
वहीं दूसरी तरफ, इस बड़े झटके पर तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने फिलहाल पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है और पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अब देखना यह होगा कि दो महीने के इस अल्टीमेटम के बाद ममता बनर्जी अपनी पार्टी का नया ठिकाना कहाँ बनाती हैं!