केरल विधानसभा चुनाव में UDF (यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट) की बंपर जीत को 8 दिन बीत चुके हैं। 140 सीटों वाली विधानसभा में 102 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी करने वाली कांग्रेस के लिए यह जश्न का समय होना चाहिए था, लेकिन फिलहाल पार्टी \’अंतर्कलह\’ और \’असमंजस\’ के दौर से गुजर रही है। दिल्ली से तिरुवनंतपुरम तक सिर्फ एक ही सवाल है— केरल का अगला मुख्यमंत्री कौन?
आमतौर पर प्रचंड बहुमत मिलने के 2-3 दिनों के भीतर मुख्यमंत्री का नाम तय हो जाता है, लेकिन केरल में 8 दिन बाद भी सस्पेंस बरकरार है। खुद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सन्नी जोसेफ ने स्वीकार किया है कि इस देरी ने गठबंधन की शानदार जीत की चमक को फीका कर दिया है। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक समर्थकों के बीच जंग छिड़ी है। राहुल गांधी ने खुद कमान संभाली है और केरल के आधा दर्जन से अधिक नेताओं के साथ मैराथन बैठकें की हैं।
मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए मुख्य रूप से तीन नाम चर्चा में रहे हैं, लेकिन अब मुकाबला दो दिग्गजों के बीच सिमटता दिख रहा है:
दावेदार |
ताकत |
चुनौती |
केसी वेणुगोपाल |
हाईकमान (राहुल गांधी) के सबसे भरोसेमंद, 50 से ज्यादा विधायकों का समर्थन। |
दिल्ली की राजनीति छोड़कर राज्य में आना। |
वीडी सतीशन |
कार्यकर्ताओं में बेहद लोकप्रिय, विजयन सरकार के खिलाफ आक्रामक चेहरा। |
विधायकों के संख्या बल में वेणुगोपाल से पीछे। |
रमेश चेन्नीथला |
अनुभवी नेता और प्रशासनिक पकड़। |
वेणुगोपाल और सतीशन की दौड़ में फिलहाल पिछड़ते दिख रहे हैं। |
सूत्रों के मुताबिक, सोनिया गांधी के आवास पर चल रही हाई-लेवल मीटिंग में राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री के नाम के साथ-साथ \’अनुशासन\’ पर भी बात की है। राहुल ने नेताओं से दो टूक पूछा कि सोशल मीडिया और सड़कों पर जो वेणुगोपाल बनाम सतीशन की लड़ाई चल रही है, क्या वह Sponsored है या वाकई आम लोगों का गुस्सा है?\” राहुल गांधी इस बात से नाराज बताए जा रहे हैं कि गुटबाजी की खबरें सार्वजनिक रूप से पार्टी की छवि खराब कर रही हैं।
ताजा इनपुट के अनुसार, केसी वेणुगोपाल की स्थिति सबसे मजबूत बनी हुई है। इसके तीन बड़े कारण हैं। उन्हें 50 से अधिक नवनिर्वाचित विधायकों का साथ मिला है। संगठन महासचिव के तौर पर उन्होंने देशभर में पार्टी के लिए काम किया है, जिससे गांधी परिवार का उन पर अटूट विश्वास है। गठबंधन सहयोगियों को साधने में वेणुगोपाल को माहिर माना जाता है।
UDF के सहयोगी दलों ने अब अपनी चुप्पी तोड़नी शुरू कर दी है। सरकार गठन में देरी से विकास कार्य रुके हुए हैं और प्रशासन ठप है। सहयोगियों का मानना है कि यदि अगले 24-48 घंटों में फैसला नहीं हुआ, तो विपक्ष (LDF) को सरकार पर हमला करने का बड़ा मुद्दा मिल जाएगा।
वरिष्ठ नेता के. मुरलीधरन के मुताबिक, इंतजार की घड़ियां खत्म होने वाली हैं। अगले 24 से 48 घंटों में दिल्ली से आधिकारिक नाम का ऐलान हो सकता है। क्या कांग्रेस अपनी \’आंतरिक कलह\’ को शांत कर एक सशक्त सरकार दे पाएगी? या फिर यह खींचतान भविष्य के लिए नए संकट के बीज बोएगी? केरल की नजरें अब सीधे दिल्ली के \’10 जनपथ\’ पर टिकी हैं।