शक्सगाम घाटी पर भारत-चीन आमने-सामने: पाकिस्तान का भी ज़िक्र क्यों?

शक्सगाम घाटी (Shaksgam Valley), जिसे ट्रांस-काराकोरम ट्रैक्ट भी कहते हैं, काराकोरम पर्वतमाला के उत्तर में स्थित एक दूरस्थ, ऊंचाई वाली घाटी है। यह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में आती है और सियाचिन ग्लेशियर के पास स्थित है। भारत इसे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का अभिन्न हिस्सा मानता है, जबकि चीन इसे अपना क्षेत्र बताता है। जनवरी 2026 में यह विवाद फिर गरमा गया, जब चीन ने यहां इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण (सड़कें, CPEC से जुड़े प्रोजेक्ट्स) को “अपने अधिकार” में बताया और भारत की आपत्ति खारिज कर दी।
विवाद की जड़ 1963 में है, जब पाकिस्तान ने भारत की लगभग 5,180 वर्ग किमी जमीन चीन को सौंप दी। भारत इसे अवैध मानता है, क्योंकि पाकिस्तान ने 1947-48 में PoK पर अवैध कब्जा किया था और उसे कोई हक नहीं था। समझौते में एक क्लॉज भी है कि कश्मीर विवाद सुलझने पर सीमा दोबारा तय होगी, जो खुद पाक-चीन की अनिश्चितता दिखाता है।
image:Study IQ
जनवरी 2026 में भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा, “शक्सगाम घाटी भारतीय क्षेत्र है। हम 1963 के समझौते को नहीं मानते।” थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी इसे “अवैध” करार दिया। लद्दाख के LG कविंदर गुप्ता ने कहा, “यह 1962 का नहीं, 2026 का भारत है—PoK हमारा है।” चीन की प्रवक्ता माओ निंग ने दावा किया कि क्षेत्र चीन का है और निर्माण “बियॉन्ड रिप्रोच” है।रणनीतिक महत्व: घाटी शिनजियांग से जुड़ी है, जहां चीन CPEC के जरिए पाकिस्तान तक पहुंच मजबूत कर रहा है। भारत को डर है कि इससे चीन की सैन्य तैनाती तेज होगी और PoK में उसकी पकड़ बढ़ेगी। पाकिस्तान की भूमिका “गिफ्ट” देने वाली है, जिससे त्रिकोणीय तनाव बढ़ा।
यह विवाद LAC पर पूर्वी लद्दाख तनाव के बाद नया मोर्चा खोल सकता है। भारत ने हितों की रक्षा के लिए कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखा है
Scroll to Top