दिल्ली हाई कोर्ट की कैंटीन में ‘गैस’ की कमी से लंच पर लगा स्टे

दिल्ली हाई कोर्ट में आज जिरह और दलीलों के बीच एक अजीबोगरीब संकट खड़ा हो गया। कोर्ट रूम में तो फैसले हुए, लेकिन कोर्ट की कैंटीन में आज रसोई का चूल्हा ही नहीं जल पाया। एलपीजी (LPG) सिलेंडर की किल्लत के चलते कैंटीन का पूरा ‘मेन कोर्स’ ठप हो गया है, जिससे वकीलों और मुवक्किलों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कैंटीन मैनेजर मोहर सिंह ने बताया कि गैस की सप्लाई न होने के कारण आज कैंटीन की रसोइयों में सन्नाटा पसरा है। उनके अनुसार, कैंटीन के सबसे लोकप्रिय व्यंजनों—राजमा-चावल, कढ़ी-चावल, छोले-चावल, चिकन और बिरयानी—की उपलब्धता पर अगले आदेश तक ‘स्टे’ लगा दिया गया है।

वर्तमान में कैंटीन में केवल वही चीजें मिल रही हैं जिन्हें पकाने के लिए आग की जरूरत नहीं है। भूख मिटाने के लिए अब वकीलों के पास केवल पनीर सलाद, चिकन सलाद और सैंडविच जैसे ‘हल्के’ विकल्प ही बचे हैं।

इस किल्लत के पीछे की वजह मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में चल रहे तनाव को माना जा रहा है, जिसकी वजह से कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित हुई है। हालांकि, सरकार की ओर से लगातार यह स्पष्ट किया जा रहा है कि देश में ईंधन का कोई संकट नहीं है, लेकिन देश की सबसे महत्वपूर्ण अदालतों में से एक की कैंटीन की यह स्थिति दावों पर सवाल खड़े कर रही है।

कैंटीन में मौजूद एक वकील ने कहा कि बिना गरमा-गरम खाने के दलीलों में वो दम नहीं आता। उम्मीद है कि गैस की सप्लाई जल्द बहाल होगी, वरना सैंडविच के भरोसे कोर्ट की भागदौड़ करना मुश्किल हो जाएगा।

फिलहाल, सभी की नजरें गैस एजेंसी की गाड़ी पर टिकी हैं। जब तक सिलेंडर नहीं आते, तब तक दिल्ली हाई कोर्ट के गलियारों में चर्चा मुकदमों से ज्यादा ‘दो वक्त की रोटी’ और ‘राजमा-चावल’ की हो रही है।

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