बदल जाएगा देश का सियासी नक्शा! लोकसभा की सीटें होंगी 816?

केंद्र सरकार देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर आ रही है कि 2029 के लोकसभा चुनावों में महिला आरक्षण को हकीकत बनाने के लिए सरकार लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने की दिशा में कदम उठा सकती है। इसके लिए मौजूदा संसद सत्र में ही ‘नारी वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक’ पेश किए जाने की संभावना है।

दरअसल, सरकार ने महिला आरक्षण कानून (नारी वंदन अधिनियम) तो पारित कर दिया है, लेकिन तकनीकी पेंच यह था कि इसे जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू किया जाना था। अब सरकार की मंशा है कि 2027 की जनगणना की प्रतीक्षा किए बिना, 2011 की जनगणना के आधार पर ही परिसीमन कराकर 2029 में महिलाओं को 33% आरक्षण दे दिया जाए। सीटों की संख्या 50% बढ़ाने से पुरुषों की मौजूदा सीटों पर भी असर नहीं पड़ेगा और महिलाओं को भी उचित प्रतिनिधित्व मिल सकेगा।

सीटों के बढ़ने से उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों की सियासी ताकत और बढ़ जाएगी। देखिए बड़े राज्यों का संभावित आंकड़ा:

राज्य मौजूदा सीटें प्रस्तावित सीटें वृद्धि
उत्तर प्रदेश 80 120 +40
महाराष्ट्र 48 72 +24
पश्चिम बंगाल 42 63 +21
बिहार 40 60 +20
तमिलनाडु 39 59 +20
मध्य प्रदेश 29 44 +15
राजस्थान 25 38 +13

प्रस्ताव के मुताबिक, न केवल सामान्य बल्कि आरक्षित सीटों में भी इजाफा होगा:

  • अनुसूचित जाति (SC): 84 से बढ़कर 126 सीटें।

  • अनुसूचित जनजाति (ST): 47 से बढ़कर 70 सीटें।

हिमाचल प्रदेश में सीटें 4 से बढ़कर 6 और गोवा में 2 से बढ़कर 3 होने की उम्मीद है। नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों (अरुणाचल, सिक्किम, मिजोरम, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय) में भी 1-1 सीट बढ़ने का अनुमान है। वहीं दिल्ली की सीटें 7 से बढ़कर 11 और जम्मू-कश्मीर की 5 से बढ़कर 8 हो सकती हैं।

सीटों की संख्या बढ़ने को लेकर दक्षिण भारतीय राज्यों में जनसंख्या नियंत्रण नीतियों के कारण प्रतिनिधित्व कम होने का डर है। हालांकि, सरकारी सूत्रों का दावा है कि नया परिसीमन इस तरह होगा कि किसी भी राज्य का वर्तमान अनुपात कमजोर नहीं पड़ेगा।

यह बदलाव एक संवैधानिक संशोधन पर निर्भर करेगा, जिसके लिए सरकार एनडीए के साथ-साथ विपक्षी दलों के बीच भी आम सहमति बनाने की कोशिश कर रही है। यदि यह बिल पास होता है, तो 2029 का चुनाव भारतीय संसदीय इतिहास का सबसे बड़ा चुनाव होगा।

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