नोएडा में हाल ही में हुए श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि प्रदेश के औद्योगिक विकास में बाधा डालने वाले और श्रमिकों के नाम पर अराजकता फैलाने वाले तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा। उच्चस्तरीय बैठक में सीएम ने निर्देश दिए कि जो लोग वास्तव में श्रमिक नहीं हैं और हिंसा में शामिल थे, उनके पोस्टर सार्वजनिक स्थलों पर लगाए जाएं।
मुख्यमंत्री ने गौतमबुद्ध नगर की घटना का कड़ा संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि अशांति फैलाने वाले बाहरी तत्वों की तत्काल पहचान की जाए। उपद्रव करने वाले ‘छद्म श्रमिकों’ की तस्वीरें सार्वजनिक स्थानों पर लगाई जाएंगी ताकि जनता जान सके कि विकास को बाधित करने के पीछे कौन है। अफवाह फैलाने वाले संगठनों और अराजक तत्वों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत सख्त कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
एक ओर जहाँ उपद्रवियों पर सख्ती है, वहीं मुख्यमंत्री ने वास्तविक श्रमिकों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि प्रत्येक श्रमिक को सम्मानजनक कार्य-परिस्थितियां, समय पर पूर्ण वेतन और वैधानिक सुविधाएं मिलना उसका अधिकार है। इसके हनन पर दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई होगी।”
श्रमिकों के शोषण की शिकायतों को देखते हुए सीएम ने अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक विशेष जांच समिति गठित की है। प्रदेश की सभी मैनपावर सप्लाई एजेंसियों की कार्यप्रणाली की बारीकी से जांच होगी। एजेंसियां श्रमिकों को कितना भुगतान कर रही हैं और उन्हें ईएसआई (ESI) व बीमा जैसी सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं, इसका सूक्ष्म परीक्षण किया जाएगा। औद्योगिक इकाइयों में प्रबंधन संबंधी शिकायतों को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री ने ‘थर्ड पार्टी सर्वे’ कराने का भी निर्देश दिया है।
सभी सरकारी और निजी इकाइयों में एक सक्रिय ‘शिकायत निवारण सेल’ बनाना अनिवार्य होगा। श्रमिकों के लिए कार्यस्थलों पर उच्च गुणवत्ता वाली मेस (भोजन) व्यवस्था विकसित की जाएगी। सीएम ने स्पष्ट आदेश दिया है कि बढ़े हुए वेतन का लाभ 01 अप्रैल से हर हाल में सभी श्रमिकों को मिलना चाहिए।
बैठक में बताया गया कि वेतन वृद्धि के निर्णय से श्रमिक और उद्यमी दोनों संतुष्ट हैं और गौतमबुद्ध नगर में स्थिति अब पूरी तरह सामान्य है। मुख्यमंत्री के इन कड़े निर्देशों ने यह संदेश साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में निवेश का माहौल खराब करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है।