अमित शाह ने आंकड़ों से दूर किया दक्षिण भारत का डर

संसद के विशेष सत्र में परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण बिल को लेकर जबरदस्त गहमागहमी देखने को मिली। विपक्ष के हमलों के बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कमान संभाली और आंकड़ों के जरिए यह स्पष्ट कर दिया कि नए परिसीमन से दक्षिण भारतीय राज्यों की राजनीतिक शक्ति कम नहीं होगी, बल्कि और बढ़ेगी।

अमित शाह ने उन आशंकाओं को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा जा रहा था कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होने से दक्षिण के राज्यों की सीटें घट जाएंगी। उन्होंने सदन में राज्यवार डेटा पेश किया:

राज्य वर्तमान सीटें (प्रतिशत) परिसीमन के बाद सीटें (अनुमानित)
कर्नाटक 28 (5.15%) 43 (5.14%)
तेलंगाना 17 (3.13%) 26 (3.19% लगभग)
तमिलनाडु 39 (7.18%) 59 (7.23%)
आंध्र प्रदेश 25 (4.60%) 38 (4.65% लगभग)

अमित शाह, गृहमंत्री ने कहा कि भ्रम फैलाया जा रहा है कि दक्षिण की क्षमता कम हो जाएगी। सच यह है कि अभी दक्षिण से 129 सांसद (23.76%) आते हैं, जो परिसीमन के बाद बढ़कर 195 सांसद (23.97%) हो जाएंगे। दक्षिण की शक्ति घटेगी नहीं, बल्कि बढ़ेगी।

विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए गृहमंत्री ने साफ किया कि नई व्यवस्था तुरंत लागू नहीं होने वाली है। उन्होंने कहा परिसीमन आयोग की रिपोर्ट संसद की स्वीकृति और राष्ट्रपति की मुहर के बाद ही प्रभावी होगी। 2029 से पहले इसे लागू करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। तब तक होने वाले सभी चुनाव पुरानी सीटों और पुरानी व्यवस्था के आधार पर ही होंगे।

अखिलेश यादव पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है, अभी सब कुछ पुरानी व्यवस्था के तहत ही चलेगा। महिला आरक्षण के बीच विपक्ष द्वारा लगातार उठाई जा रही जाति जनगणना की मांग पर अमित शाह ने ऐतिहासिक बयान दिया। उन्होंने घोषणा की सरकार की कैबिनेट ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जाति जनगणना कराने का निर्णय ले लिया है। अगली जो भी जनगणना होगी, वह ‘जाति जनगणना’ ही होगी।

Scroll to Top