पश्चिम बंगाल की राजनीति में आए ऐतिहासिक बदलाव के बाद अब जांच एजेंसियों का शिकंजा कसना शुरू हो गया है। राज्य में सत्ता परिवर्तन और भाजपा की सरकार बनते ही विपक्षी खेमे में खलबली मच गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ममता बनर्जी सरकार में कद्दावर मंत्री रहे सुजीत बोस को गिरफ्तार कर लिया है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद सुजीत बोस टीएमसी के पहले ऐसे बड़े नेता हैं जिन्हें केंद्रीय एजेंसी ने अपनी हिरासत में लिया है।
सूत्रों के मुताबिक, पूर्व अग्निशमन मंत्री सुजीत बोस को कोलकाता स्थित CGO कॉम्प्लेक्स में पूछताछ के लिए तलब किया गया था। करीब 10 घंटे तक चली मैराथन पूछताछ के बाद अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार करने का फैसला लिया। ED सूत्रों का कहना है कि बोस जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे और उनके बयानों में भारी विसंगतियां (Contradictions) पाई गईं।
यह पूरी कार्रवाई नगरपालिका भर्ती घोटाले से जुड़ी है। ED की जांच के अनुसार, 2014 के बाद से पश्चिम बंगाल की लगभग 60 नगरपालिकाओं में करीब 5,000 अवैध नियुक्तियां की गईं। आरोप है कि सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के भर्ती घोटाले के आरोपियों के तार इन नगरपालिकाओं से भी जुड़े थे। दक्षिण दमदम, कमरहटी, पानिहाटी और उत्तर बंगाल की कई नगरपालिकाओं में पैसे लेकर नौकरियां बांटने का संदेह है। इससे पहले 10 अक्टूबर 2025 को ED ने बोस के साल्ट लेक स्थित दफ्तर, उनके बेटे के रेस्तरां और उनके करीबियों के ठिकानों पर सघन छापेमारी की थी।
सुजीत बोस का राजनीतिक ग्राफ काफी दिलचस्प रहा है। उन्होंने CPI(M) के युवा संगठन DYFI से राजनीति सीखी। 2001 में वह ममता बनर्जी की TMC में शामिल हुए और अपने ही \’गुरु\’ सुभाष चक्रवर्ती को चुनौती दी। 2009 के उपचुनाव में जीत दर्ज करने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार तीन बार विधाननगर से विधायक रहे। वह न केवल सरकार में मंत्री थे, बल्कि कोलकाता की मशहूर श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब दुर्गा पूजा के कर्ता-धर्ता के रूप में भी बेहद प्रभावशाली माने जाते हैं।
बंगाल चुनाव के नतीजों ने जहाँ टीएमसी को सत्ता से बाहर किया, वहीं सुजीत बोस की इस गिरफ्तारी ने पार्टी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। चुनाव प्रचार के दौरान ही उन्हें कई बार समन भेजे गए थे, लेकिन सत्ता के संरक्षण और कानूनी दांव-पेंचों के चलते वह बचते रहे। अब राज्य में बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों के बीच ED की इस कार्रवाई को एक बड़े \’क्लीन-अप ड्राइव\’ के तौर पर देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि बोस की गिरफ्तारी से इस घोटाले में शामिल कई और बड़े चेहरों के नाम सामने आ सकते हैं।
