आखिर! आंध्र प्रदेश को बच्चों की जरूरत क्यों पड़ी?

आंध्र प्रदेश सरकार ने राज्य में घटती जनसंख्या को रोकने के प्रयासों के तहत राज्यवासियों से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील की। इसके लिए सरकार बकायदा प्रोत्साहन राशि भी देगी। चंद्रबाबू नायडू सरकार ने तीसरे बच्चे के जनम पर 30,000 और चौथे बच्चे के जनम पर 40,000 रुपये देने का ऐलान किया है।

चंद्रबाबू नायडू ने श्रीकाकुलम जिले के नरसत्रापेटा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने यह निर्णय लिया है और एक महीने के भीतर इसके बारे में विस्तृत जानकारी देगी। उन्होंने कहा मैंने एक नया निर्णय लिया है। हम तीसरे बच्चे के जन्म के तुरंत बाद 30,000 रुपये और चौथे बच्चे के जनम पर 40,000 रुपये देंगे।

चंद्रबाबू नायडू और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन लंबे समय से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील करते रहे हैं। ऐसे बयान मुख्य रूप से घटती जनम दर, बुजुर्ग होती है। आबादी और भविष्य में लोकसभा सीटों के परिसीमन को लेकर चिंताओं के बीच आते रहे हैं।

देश ने एक ऐसा समय भी देखा है जब हम दो हमारे दो और जनसंख्या नियंत्रण से जुड़े नारे सुनाई देते हैं। 1970 के दशक में नसबंदी अभियान देश की विवादित सरकारी नीतियों में शामिल रही, लेकिन 2026 आते -आते तस्वीर पूरी तरह से बदलती हुई दिखाई है जिसने एक नई बहस छेड़ दी है।

दक्षिण भारत के कई राज्यों की जन्म दर में गिरावट देखी जा रही है जिनमें आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु इत्यादि शामिल हैं। यह राज्य तेजी से बुजुर्ग आबादी वाले समाज में तब्दील हो रहे हैं। जिसका मतलब है कि इन राज्यों में युवाओं की तुलना में बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि महिला शिक्षा, शहरीकरण, करियर पर फोकस, देर से शादी और छोटे परिवारों की सोच ने भी जन्म दर घटाई है।

इसके अलावा बड़ी संख्या में युवा रोजगार के लिए दूसरे राज्यों और विदेशों में पलायन कर रहे हैं। इसका असर स्थानीय जनसंख्या संरचना पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में दक्षिण भारत को श्रमिकों की कमी, बढ़ते स्वास्थ्य खर्च और पेंशन बोझ जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

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