पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान युद्ध के चलते दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आया है । जहां वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं, वहीं भारतीय उपभोक्ताओं को इस वैश्विक संकट से काफी हद तक राहत मिली है। आइए समझते हैं कि इस संकट के बीच दुनिया भर में तेल के दामों का क्या हाल है और इस रेस में भारत कहां खड़ा है।
28 फरवरी 2026 से पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने के कारण दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऑयल चोकपॉइंट \’स्ट्रैट ऑफ होर्मुज\’ से होने वाली तेल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है । इस व्यवधान के चलते अप्रैल और मई 2026 के शुरुआती हफ्तों में ब्रेंट क्रूड (कच्चा तेल) लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर ट्रेड कर रहा है। जिन देशों में ईंधन बाजार पूरी तरह से उदारीकृत (Liberalised) हैं, वहां अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर सीधे और तुरंत पेट्रोल पंपों पर देखने को मिला है ।
वैश्विक आंकड़े: किस देश में कितना बढ़ा तेल का दाम?
23 फरवरी 2026 से 15 मई 2026 के बीच दुनिया के प्रमुख देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आई भारी तेजी को आप नीचे दी गई तालिका से समझ सकते हैं:
ईंधन कीमतों में बदलाव (प्रतिशत में)
देश |
पेट्रोल में बढ़ोतरी |
डीजल में बढ़ोतरी |
| म्यांमार | +89.7% | +112.7% |
| मलेशिया | +56.3% | +71.2% |
| पाकिस्तान | +54.9% | +44.9% |
| यूएई (UAE) | +52.4% | +86.1% |
| अमेरिका | +44.5% | +48.1% |
| नेपाल | +38.2% | +58.5% |
| साउथ अफ्रीका | +33.1% | +63.6% |
| यूनाइटेड किंगडम (UK) | +19.2% | +34.2% |
| चीन | +21.7% | +23.7% |
| जापान | +9.7% | +11.2% |
| सऊदी अरब | 0.0% | 0.0% |
| भारत | +4.2% | +4.4% |
बड़े देशों का हाल: कहां जनता पर पड़ा कितना बोझ?
म्यांमार में पेट्रोल करीब 90% और डीजल 112% से ज्यादा महंगा हो चुका है । वहीं, पाकिस्तान में पेट्रोल के दाम 55% तक बढ़ गए हैं।अमेरिका में टैक्स कम होने की वजह से कच्चे तेल का असर तुरंत बाजार पर पड़ता है, जिसके चलते वहां पेट्रोल 44.5% और डीजल 48.1% महंगा हुआ है। यूरोप में भारी एक्साइज ड्यूटी के बावजूद ब्रिटेन में पेट्रोल 19.2% और डीजल 34.2% बढ़ा है । एशिया में सिंगापुर ने पेट्रोल पर नियंत्रण रखा लेकिन वहां डीजल में 64.7% की भारी उछाल देखी गई ।
भारत की स्थिति: वैश्विक आग के बीच \’राहत का टापू\’
दुनिया भर के इन डराने वाले आंकड़ों के बीच भारतीय बाजार एक अपवाद बनकर उभरा है। भारत में तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल दोनों पर 3 रुपये 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। करीब चार साल के लंबे अंतराल के बाद यह पहला बदलाव है।
करीब 95 रुपये के बेस प्राइस पर की गई यह बढ़ोतरी सिर्फ 4% से थोड़ी ही ज्यादा है । तेल उत्पादक खाड़ी देशों (जैसे सऊदी अरब, जहां 0% बदलाव है) को छोड़ दें, तो किसी भी प्रमुख अर्थव्यवस्था में यह सबसे कम बढ़ोतरी है ।
भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने, जो कुल रिटेल मार्केट के 90% हिस्से पर नियंत्रण रखती हैं, 23 फरवरी 2026 से कीमतों को बांधकर रखा था । इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार की महंगाई को खुद कंपनियों ने झेला, जिसके कारण उन्हें रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का अंडर-रिकवरी (नुकसान) उठाना पड़ रहा था ।
जहां पूरी दुनिया 10% से लेकर 90% तक की महंगाई से जूझ रही है, वहीं भारत ने पूरे 76 दिनों तक कीमतों को स्थिर रखने के बाद जनता पर बेहद मामूली बोझ डाला है ।