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A wonderful serenity has taken possession of my entire soul, like these sweet mornings of spring which I enjoy with my whole heart.

बिहार का नया ‘सुल्तान’: क्या शाहनवाज हुसैन बदलेंगे 2026 का क्लाइमेक्स?

बिहार की राजनीति इस वक्त एक ऐसे चौराहे पर खड़ी है जहाँ ‘सुशासन बाबू’ की विरासत को संभालने के लिए भाजपा एक नए और सर्वमान्य चेहरे की तलाश में है। सम्राट चौधरी से लेकर नित्यानंद राय तक कई दिग्गज कतार में हैं, लेकिन गलियारों में एक नाम की गूंज सबसे अलग है— सैयद शाहनवाज हुसैन। […]

अब ममता बनर्जी से नाराज हो गईं देश की राष्ट्रपति

अमूमन शांत और शालीन रहने वाली देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का शनिवार को पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में एक अलग ही रूप देखने को मिला। 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस (International Santal Conference) में शामिल होने पहुंचीं राष्ट्रपति ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम लेकर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की। विवाद की जड़ ‘इंटरनेशनल आदिवासी

सुरों में ‘अश्लीलता’ का ज़हर: क्या डिजिटल आज़ादी ने बिगाड़ी गीतों की तासीर?

मशहूर सिंगर बादशाह के नए गाने ‘टटीरी’ ने एक बार फिर संगीत जगत में विवादों का बवंडर खड़ा कर दिया है। हनी सिंह के विवादित ट्रैक हों या अमर सिंह ‘चमकीला’ की बायोपिक में दिखाए गए डबल मीनिंग गीत—सवाल वही पुराना है, आखिर गानों में ‘गंदी बात’ का ये सिलसिला थम क्यों नहीं रहा? एक

बादशाह पर पुलिस का ‘हंटर’: ‘टटीरी’ गाने पर FIR, लुकआउट नोटिस जारी

मशहूर बॉलीवुड सिंगर आदित्य प्रतीक सिंह सिसोदिया उर्फ बादशाह की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। हरियाणा पुलिस ने उनके हालिया रिलीज हुए विवादित गाने ‘टटीरी’ को लेकर उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस का यह सख्त कदम गायक को देश छोड़कर भागने से

जब भारत में पहली बार बजी ‘टेलीफोन’ की घंटी

यह कहानी है भारत में संचार क्रांति के उस दौर की, जब बिजली की तरह तार से दौड़ती आवाज किसी जादू से कम नहीं थी। आइए जानते हैं उस भारतीय शख्सियत के बारे में, जिसने अंग्रेजों के दौर में अपनी धाक जमाई और देश का पहला ‘प्राइवेट’ टेलीफोन कनेक्शन हासिल किया। साल 1876 में अलेक्जेंडर

‘सुशासन बाबू’ से ‘पलटू बाबू’ तक, बिहार की राजनीति के 20 साल

बिहार की राजनीति के क्षितिज पर पिछले दो दशकों से एक ही नाम छाया रहा— नीतीश कुमार। साल 2005 के 24 नवंबर को जब उन्होंने पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता संभाली थी, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह ‘इंजीनियर’ बिहार के इतिहास की सबसे लंबी राजनीतिक पारी खेलने जा रहा है।

दीदी का ‘धरना’ दांव: लोकतंत्र की दुहाई या चुनावी शह-मात?

पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘दीदी’ के नाम से मशहूर ममता बनर्जी ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक बिसात से सबको चौंका दिया है। सिंगूर आंदोलन से लेकर व्हीलचेयर पर चुनाव प्रचार तक, ममता ने हमेशा साबित किया है कि उन्हें ‘स्ट्रीट फाइटर’ क्यों कहा जाता है। लेकिन इस बार लड़ाई सड़क से बढ़कर सीधे

बड़ी खबर: लद्दाख के उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने दिया इस्तीफा

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के राजनीतिक गलियारे से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। लद्दाख के उपराज्यपाल (LG) कविंद्र गुप्ता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। महज 9 महीने के कार्यकाल के बाद अचानक आए इस फैसले ने सभी को चौंका दिया है। उनके इस अचानक त्यागपत्र से प्रदेश

बस अब घर जाना चाहता हूँ…” मिडिल-ईस्ट की जंग के बीच फंसे डैरेन सैमी

खेल के मैदान पर चौके-छक्के बरसाने वाले खिलाड़ी आज एक अनचाही बेबसी के बीच फंसे हैं। मिडिल-ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच गहराते युद्ध के संकट ने क्रिकेट की दुनिया की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा दिया है। हालात इतने नाजुक हैं कि टी-20 वर्ल्ड कप से बाहर होने के बाद भी वेस्टइंडीज

कैसे ‘छोटे भाई’ से ‘किंगमेकर’ और फिर ‘किंग’ बन गई भाजपा?

भारतीय राजनीति के बिसात पर पिछले एक दशक में अगर कुछ सबसे तेजी से बदला है, तो वह है भाजपा का अपने सहयोगियों के साथ समीकरण। कभी क्षेत्रीय क्षेत्रिय पार्टियों के पीछे चलने वाली भारतीय जनता पार्टी अब ‘ड्राइविंग सीट’ पर है। राज्यसभा चुनाव के लिए विनोद तावड़े, रामदास आठवले, रामराव वडकुते और माया इवनाते

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