केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) मुख्यालय में एक बेहद खास और गरिमामयी साहित्य कार्यक्रम का आयोजन हुआ। सीआईएसएफ के एआईजी (प्रशासन) जय प्रकाश आजाद द्वारा लिखित नई और बेहद प्रेरणादायक पुस्तक ‘होगी जय… हे पुरुषोत्तम नवीन!’ का आज सीआईएसएफ महानिदेशक (DG) प्रवीर रंजन द्वारा औपचारिक विमोचन किया गया। यह पुस्तक आधुनिक जीवन की चुनौतियों से जूझ रहे युवाओं और सुरक्षाकर्मियों के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में सामने आई है।
महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी \’निराला\’ की प्रसिद्ध कविता ‘राम की शक्ति पूजा’ से गहन प्रेरणा लेकर लिखी गई यह पुस्तक आधुनिक जीवन की चुनौतियों, निरंतर संघर्षों और क्षणिक निराशाओं के बीच व्यक्ति को आत्मविश्वास, धैर्य तथा कर्म के सकारात्मक मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रबल प्रेरणा प्रदान करती है।
प्रभु श्रीराम के अदम्य साहस, शक्ति पूजा और अंतिम विजय के माध्यम से यह कृति हर व्यक्ति के भीतर छिपी \’पुरुषोत्तम\’ की संभावनाओं को जगाती है तथा उन्हें अपनी क्षमताओं पर विश्वास करने के लिए प्रेरित करती है। रामायण का पुनर्लेखन नहीं, युवा पीढ़ी के लिए कर्मयोग का संदेश लेखक जय प्रकाश आजाद ने स्पष्ट किया कि यह पुस्तक रामायण का पुनर्लेखन नहीं है।
बल्कि, यह श्रीराम के जीवन, संघर्ष, धैर्य और कर्मयोग से सीख लेकर आज की युवा पीढ़ी को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करने का एक सार्थक प्रयास है। पुस्तक में लेखक ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों को भी साझा किया है, जिससे यह और अधिक जीवंत, वास्तविक तथा पाठकों के करीब महसूस होती है।
पुस्तक का विमोचन करते हुए सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने लेखक की सराहना की और कहा कि होगी जय… हे पुरुषोत्तम नवीन! आज के तनावपूर्ण और चुनौतीपूर्ण समय में युवाओं एवं फोर्स पर्सनल के लिए एक प्रेरणादायी मार्गदर्शक है। यह पुस्तक आंतरिक शक्ति, सकारात्मक सोच, धैर्य और निरंतर कर्म के माध्यम से जीवन की बाधाओं को पार करने का संदेश देती है।
महाकवि निराला की रचना ‘राम की शक्ति पूजा’ से प्रेरित यह कृति हर व्यक्ति के भीतर छिपे ‘पुरुषोत्तम’ को जागृत करने की प्रेरणा देती है। यह पुस्तक आने वाले दिनों में न सिर्फ सुरक्षा बल के जवानों बल्कि जीवन के कुरुक्षेत्र में संघर्ष कर रहे हर आम और खास व्यक्ति के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत साबित होगी।
