ECI पर TMC का आरोप – व्हाट्सऐप चैट के जरिए दिए जा रहे निर्देश

पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर सियासी तापमान चरम पर है। तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने Election Commission of India (ECI) पर गंभीर आरोप लगाते हुए चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। TMC सूत्रों का दावा है कि मतदाता सूची से जुड़े महत्वपूर्ण निर्देश औपचारिक और वैधानिक माध्यमों की बजाय व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए प्रसारित किए गए।

पार्टी का कहना है कि इस संबंध में कुछ व्हाट्सऐप चैट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें कथित तौर पर अधिकारियों के बीच निर्देशों का आदान-प्रदान दिख रहा है। इन चैट्स को लेकर सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि देश की सर्वोच्च अदालत ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और विधिसम्मत प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद अगर आधिकारिक संचार की जगह अनौपचारिक माध्यमों का इस्तेमाल हो रहा है, तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है।

TMC का आरोप है कि यह न केवल प्रक्रिया का उल्लंघन है, बल्कि इससे मतदाता सूची की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर भी असर पड़ सकता है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, स्पेशल रोल ऑब्जर्वर सी. मुरुगन ने माइक्रो ऑब्जर्वर्स के व्हाट्सऐप ग्रुप में जन्म प्रमाणपत्रों की स्वीकार्यता को लेकर निर्देश दिए। TMC का दावा है कि इन निर्देशों का उद्देश्य मतदाता सूची से नामों के विलोपन (डिलीशन) की संख्या बढ़ाना था।

अभिषेक बनर्जी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि माइक्रो ऑब्जर्वर्स की भूमिका केवल सहायक (assistive) होनी चाहिए। ऐसे में सीधे निर्देश देना या वैधानिक प्रक्रिया को दरकिनार करना नियमों के खिलाफ है।

TMC ने यह भी आरोप लगाया है कि District wise नियुक्त रोल ऑब्जर्वर्स के लॉगिन क्रेडेंशियल्स का उपयोग कथित तौर पर कोलकाता के एक central office से किया गया। पार्टी का दावा है कि लॉगिन डेटा के जरिए विशेष समुदाय को निशाना बनाते हुए क्वेरी जनरेट की गईं।

सूत्रों का कहना है कि यदि इस मामले की स्वतंत्र जांच हो, तो लॉगिन डिवाइस की टावर लोकेशन और आईपी एड्रेस से कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। अभिषेक बनर्जी ने दो टूक कहा कि निर्वाचन आयोग की वैधता जनता के विश्वास से आती है, न कि किसी राजनीतिक संरक्षण से। उन्होंने संकेत दिया कि TMC इस मुद्दे को सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाएगी और जरूरत पड़ने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करेगी।

फिलहाल, निर्वाचन आयोग की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। लेकिन वायरल व्हाट्सऐप चैट और TMC के हमले ने बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा सियासी टकराव को और तेज कर सकता है।

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