GDP की जगह NDP: भारत की अर्थव्यवस्था मापने का नया पैमाना?

भारत की अर्थव्यवस्था को लंबे समय से सकल घरेलू उत्पाद (GDP) से मापा जाता रहा है। GDP एक वर्ष में देश के अंदर उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं की कुल बाजार मूल्य है, जिसमें कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र और अन्य गतिविधियां शामिल हैं। यह अर्थव्यवस्था की रफ्तार बताता है, लेकिन इसमें उत्पादन प्रक्रिया में मशीनों की टूट-फूट (डिप्रीसिएशन) और प्राकृतिक संसाधनों (जैसे कोयला, तेल, खनिज) की कमी को ध्यान नहीं दिया जाता।इसकी तुलना में नेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट (NDP) अधिक यथार्थवादी है।
NDP = GDP – पूंजीगत संपत्तियों का मूल्यह्रास (डिप्रीसिएशन) और प्राकृतिक संसाधनों की कमी। इससे उत्पादन की वास्तविक लागत और उपलब्ध आय का बेहतर अंदाजा लगता है। उदाहरण के लिए, FY25 में भारत का GDP करीब 330.7 लाख करोड़ रुपये था, जबकि डिप्रीसिएशन करीब 37 लाख करोड़ होने से NDP 293.9 लाख करोड़ रहा।
हाल ही में इकोनॉमिक टाइम्स की पत्रकार अनुष्का साहनी की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है. मोदी सरकार GDP की जगह NDP को मुख्य आर्थिक संकेतक बनाने पर विचार कर रही है। यह बदलाव संयुक्त राष्ट्र के सिस्टम ऑफ नेशनल अकाउंट्स (SNA) 2025 के दिशानिर्देशों से प्रेरित है। SNA 2025 में NDP को “कॉन्सेप्चुअली सुपीरियर” बताया गया है, क्योंकि यह स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) और वास्तविक कल्याण को बेहतर दर्शाता है। वैश्विक स्तर पर कल्याण और पर्यावरण पर फोकस बढ़ने से नेट मापदंडों को प्राथमिकता दी जा रही है।सांख्यिकी मंत्रालय SNA 2025 की सिफारिशें लागू करने के लिए डेटा और विधियों में बदलाव का मूल्यांकन कर रहा है। राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी सलाहकार समिति के तहत एक सब-कमेटी गठित की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, IMF दिशानिर्देशों के अनुरूप यह बदलाव वित्त वर्ष 2029-30 तक लागू हो सकता है। फिलहाल भारत सालाना NDP जारी करता है, लेकिन तिमाही आंकड़े सिर्फ GDP के आते हैं।
Image : Business standard
यह शिफ्ट अर्थव्यवस्था को अधिक पारदर्शी और टिकाऊ बनाएगा, लेकिन विकास दर थोड़ी कम दिख सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे नीति-निर्माण बेहतर होगा, क्योंकि पर्यावरण और पूंजी संरक्षण पर जोर बढ़ेगा। विकसित भारत के लक्ष्य के लिए यह कदम महत्वपूर्ण है।
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