NEET UG 2026 Cancelled: पेपर लीक के ‘लीकतंत्र’ ने फिर हिलाया देश

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने एक बड़ा फैसला लेते हुए 3 मई 2026 को आयोजित हुई NEET (UG) 2026 की परीक्षा को रद्द कर दिया है। पेपर लीक की बढ़ती रिपोर्टों और राजस्थान से मिले पुख्ता सबूतों के बाद, केंद्र सरकार की मंजूरी मिलते ही यह कदम उठाया गया। अब इस पूरे मामले की जांच CBI को सौंप दी गई है।

इस फैसले ने उन 22 लाख से ज्यादा छात्रों के सपनों पर पानी फेर दिया है, जिन्होंने दिन-रात मेहनत कर डॉक्टर बनने का सपना देखा था। एनटीए जल्द ही परीक्षा का नया शेड्यूल और एडमिट कार्ड जारी करेगा। दोबारा परीक्षा के लिए छात्रों को कोई नई फीस नहीं देनी होगी और पुराने रजिस्ट्रेशन के आधार पर ही वे परीक्षा दे सकेंगे।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, राजस्थान स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) की शुरुआती जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। कथित तौर पर प्रश्न पत्र की एक पीडीएफ फाइल केरल से राजस्थान के सीकर में सर्कुलेट हुई थी। दावा किया जा रहा है कि 320 में से 120 सवाल परीक्षा से पहले ही लीक हो चुके थे।

नीट रद्द होने के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, \”यह अब कोई परीक्षा नहीं रही, नीट अब एक नीलामी बन गई है।\” विपक्ष ने शिक्षा मंत्रालय पर भी सवाल खड़े किए हैं कि आखिर बार-बार ऐसी गड़बड़ी क्यों हो रही है।

हैरानी की बात यह है कि जहाँ एक तरफ लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर है, वहीं शिक्षा मंत्रालय के आला अधिकारी सीधे सवालों से बचते नज़र आ रहे हैं। जब छात्र अपने हक के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं, तो प्रशासन उन पर लाठियां बरसा रहा है। जवाबदेही तय करने के बजाय सिस्टम की चुप्पी युवाओं के गुस्से को और भड़का रही है।

भारत में पेपर लीक की बीमारी लाइलाज होती जा रही है। 2013 के व्यापम घोटाले से शुरू हुआ यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा:

  • 2024: यूपी पुलिस कांस्टेबल और UGC-NET परीक्षा रद्द।

  • 2022: रेलवे भर्ती (RRB NTPC) विवाद, जिसमें 1.25 करोड़ युवा प्रभावित हुए।

  • 2018: CBSE 10वीं और 12वीं के गणित-अर्थशास्त्र पेपर लीक।

जानकारों का मानना है कि नीट का ऑफलाइन (पेन-पेपर) मोड ही इसकी सबसे बड़ी कमजोरी है। प्रिंटिंग प्रेस से लेकर ट्रांसपोर्ट तक, जितने ज्यादा हाथ शामिल होते हैं, लीक का खतरा उतना ही बढ़ जाता है। इसके उलट JEE जैसी परीक्षाएं, जो पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (CBT) हैं, सुरक्षित मानी जाती हैं।

सीबीआई जांच से शायद कुछ चेहरे बेनकाब हो जाएं, लेकिन क्या सिस्टम में जमी \’दीमक\’ खत्म होगी? जब तक सरकार जिम्मेदारी नहीं लेगी और तकनीकी बदलाव नहीं करेगी, तब तक गरीब और मध्यम वर्ग का होनहार छात्र इस \’लीकतंत्र\’ की भेंट चढ़ता रहेगा।

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