Haryana Eid Holiday Cancelled : हरियाणा में ईद की छुट्टी कैंसिल होने पर मचा बवाल, गुस्से में सड़कों पर उतरे मुसलमान

Haryana Eid Holiday Cancelled News : हरियाणा में ईद की छुट्टी कैंसिल होने के बाद बवाल मचा हुआ है। इस मामले पर हरियाणा विधानसभा में भी जमकर हंगामा देखने को मिला। हरियाणा सरकार ने फाइनेशियल ईयर एंडिंग और मार्च क्लोजिंग का हवाला देते हुए ईद की छुट्टी रद्द करने का आदेश दिया है। हरियाणा सरकार के इस फैसले पर मुस्लिम भड़कते हुए नजर आ रहे हैं। नूहं से कांग्रेस विधायक आफताब अहमद ने इसपर नाराजगी जाहिर की है। इस पर उन्होंने कहा “मुसलमानों का एक ही त्योहार है जो पूरे देश में मनाया जाता है।”  वहीं भूपेंद्र हुड्डा ने भी इस फैसले को गलत करार दिया है।

ईद की छुट्टी रद्द की तो मचा बवाल

हरियाणा सरकार के इस फैसले के बाद अब ईद पर सरकारी कार्यालय खुले रहेंगे। हालांकि वैकल्पिक अवकाश के चलते जो कर्मचारी ईद पर छुट्टी लेना चाहेंगे, उन्हें सवैतनिक अवकाश दिया जाएगा। गुरुवार को विधानसभा में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा जारी किए गए इस आदेश पर खूब हंगामा देखने को मिला।

कांग्रेस विधायक ने जताई नाराजगी 

नूंह से कांग्रेस विधायक आफताब अहमद ने कहा कि “हमारा एक ही प्रमुख त्यौहार होता है। इस त्यौहार को पूरे देश में मनाया जाता है। इसे वैकल्पिक अवकाश में बदला जाना बेहद गलत निर्णय है।” वहीं ईद की छुट्टी कैंसिल होने करने पर मुख्यमंत्री नायब सैनी ने सफाई देते हुए कहा कि “31 मार्च को मौजूदा वित्तीय वर्ष का अंतिम दिन होने के कारण यह फैसला लिया गया है।”

हरियाणा सरकार ने दी सफाई 

गौरतलब हो कि यह पहली बाद है जब ईद के राजपत्रित अवकाश को वैकल्पिक अवकाश में बदला गया है। बता दें कि वैकल्पिक अवकाश का मतलब धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व पर दी जाने वाली छुट्टी से है। यह कर्मचारी पर निर्भर करता है कि वह छुट्टी लेना चाहता है या नहीं। वहीं मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी  द्वारा जारी पत्र में कहा गया कि वित्त वर्ष 2024-25 की क्लोजिंग के कारण यह छुट्टी रद की गई है। 29 और 30 मार्च को वीकेंड है। 31 मार्च को वित्त वर्ष का आखिरी दिन है, इसी वजह से यह छुट्टी रद्द की जा रही है।

बता दें कि, प्रदेश में करीब छह प्रतिशत मुस्लिम आबादी है। जिसमें से 18 लाख मुस्लिम मतदाता हैं। इनमें आठ विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां मुस्लिम ज्यादा संख्या में है। जिसमें फिरोजपुर, झिरका, पुन्हाना, नूंह, हथीन, सोहना, यमुनानगर, साढौरा और जगाधरी शामिल हैं। ऐसे में राजनीतिक तौर पर सरकार के फैसले को लेकर सवाल उठ रहे हैं

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