SC की ममता को दो टूक: “आप लोकतंत्र के लिए खतरा हैं!

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के दफ्तर और इसके को-फाउंडर प्रतीक जैन के घर पर हुई ईडी की छापेमारी में कथित दखलअंदाजी को लेकर शीर्ष अदालत ने बेहद तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट ने ममता बनर्जी के इस कृत्य को ‘लोकतंत्र के लिए खतरा’ करार दिया है।

बुधवार को जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ईडी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस मिश्रा ने पश्चिम बंगाल सरकार के रुख पर कड़ी असहमति जताते हुए कहा किसी राज्य का मुख्यमंत्री इस तरह छापेमारी में दखल देता है और आप कहते हैं कि यह मूल रूप से राज्य और केंद्र के बीच विवाद का मामला है? यह केंद्र-राज्य विवाद नहीं है, बल्कि एक व्यक्ति (मुख्यमंत्री) द्वारा पूरे सिस्टम और लोकतंत्र को खतरे में डालने जैसा कृत्य है।

ईडी की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में सनसनीखेज दावा किया। उन्होंने बताया कि जब एजेंसी छापेमारी कर रही थी, तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी न केवल वहां पहुंचीं, बल्कि जांच से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज भी अपने साथ ले गईं। ईडी ने इस पूरे मामले में ममता बनर्जी और उनके साथ मौजूद पुलिस अधिकारियों के खिलाफ CBI जांच की मांग की है।

बंगाल सरकार की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने तकनीकी आधार पर ईडी की याचिका का विरोध किया। उनकी मुख्य दलीलें इस प्रकार थीं। यह मामला अनुच्छेद 32 (मौलिक अधिकार) के तहत नहीं, बल्कि अनुच्छेद 131 (केंद्र-राज्य विवाद) के तहत सुना जाना चाहिए। उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि ईडी कोई ‘व्यक्ति’ नहीं है, इसलिए उसके पास अनुच्छेद 32 के तहत मौलिक अधिकारों की मांग करने का आधार नहीं है।

सरकार द्वारा मांग की गई किकानून का पेचीदा सवाल होने के कारण इसे अनुच्छेद 145 के तहत 5 जजों की संविधान पीठ को भेजा जाए। जस्टिस मिश्रा ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि संविधान विशेषज्ञों (केशवानंद और सीरवाई) ने कभी ऐसी स्थिति की कल्पना नहीं की होगी कि एक मुख्यमंत्री जांच एजेंसी के काम में इस तरह बाधा डालेगी।

8 जनवरी 2026 को ईडी ने बंगाल कोयला तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में I-PAC के ऑफिस और प्रतीक जैन के आवास पर रेड की थी। ईडी का दावा है कि ममता बनर्जी पुलिस अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचीं और जांच में बाधा डाली। बंगाल पुलिस ने उल्टा ईडी अधिकारियों पर ही एफआईआर दर्ज कर दी थी, जिसे रद्द करने के लिए ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में रिट पिटीशन दाखिल की है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति कानून की प्रक्रिया को बंधक नहीं बना सकता। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि क्या कोर्ट इस मामले में सीबीआई जांच के आदेश देता है या नहीं।

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