पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद सुखेंदु शेखर रॉय के एक ताजा बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। रॉय के बयानों से साफ झलक रहा है कि पार्टी के भीतर इस समय भारी आत्ममंथन और असंतोष का दौर चल रहा है। उन्होंने जहाँ एक तरफ प्रशासनिक कमियों, संगठनात्मक चुनौतियों और भ्रष्टाचार के संस्थागत होने पर गंभीर सवाल उठाए हैं, वहीं दूसरी तरफ नेतृत्व की कुछ नीतियों की सराहना भी की है।
आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल मामले का जिक्र करते हुए सुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी और सरकार को आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में जिस जनता ने टीएमसी को 29 सीटों पर प्रचंड जीत दिलाई, वही जनता कुछ ही महीनों बाद आरजी कर मामले को लेकर सड़कों पर उतर आई। लाखों की संख्या में लोग रात-रात भर जागकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। हमें उस संदेश को समझना चाहिए था जो जनता दे रही थी।
सांसद ने बेहद कड़े शब्दों में स्वीकार किया कि उस दौरान पूरा प्रशासन आंदोलन को दबाने और मामले से जुड़े तथ्यों को छुपाने में व्यस्त था। उन्होंने कहा कि इसके बजाय दोषियों को तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेजा जाना चाहिए था। रॉय ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर सरकार जनता की आवाज को अनसुना करती है, तो लोकतंत्र में उसका असर चुनावी नतीजों पर पड़ना तय है।
अपने बयान में एक चौंकाने वाला मोड़ लेते हुए सुखेंदु शेखर रॉय ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि नई सरकार के कामकाज से आम जनता खुश है और सरकार सही दिशा में आगे बढ़ रही है। एक सरकार को जैसा काम करना चाहिए, यह बिल्कुल वैसा ही है। अधिकारी को बेहद मेहनती बताते हुए रॉय ने कहा, \”मैंने उनके जैसा मेहनती नेता अपने राजनीतिक जीवन में बहुत कम देखा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के संदर्भ में बात करते हुए रॉय ने चुनाव प्रक्रिया पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि जब आम जनता ने देखा कि 2,50,000 अर्धसैनिक बल तैनात हैं, तो उनमें यह आत्मविश्वास जगा कि उन्हें कोई वोट डालने से नहीं रोक सकता। इसी वजह से सभी मतदान केंद्रों तक पहुंचे और विपक्ष यह समझने में विफल रहा कि क्या हो रहा है।
लोकतंत्र में जनता के फैसले को सर्वोपरि बताते हुए उन्होंने विपक्ष के लूटपाट और धांधली के आरोपों पर कटाक्ष किया। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने अपनी ही पार्टी के भविष्य पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा, अब लोगों के मन में केवल यही सवाल है कि यह पार्टी कब तक जीवित रहेगी? यह आज के समय का सबसे बड़ा सवाल है।
सांसद रॉय ने चुनावी रणनीतिकार एजेंसी आई-पैक (I-PAC) को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सिर्फ आई-पैक को बलि का बकरा बनाना काफी नहीं है। रॉय ने सवाल उठाया कि क्या पार्टी नेतृत्व को उन लोगों का अंदाजा नहीं था जिन्होंने पैसे देकर टिकट मांगे थे? उन्होंने साफ किया कि पार्टी में अभी भी कई ईमानदार लोग हैं, लेकिन जिन्होंने ये घृणित कार्य किए, उन्हें बख्शा नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि असली दोष पंचायत से लेकर उच्चतम स्तर तक के उन पार्टी पदाधिकारियों का है, जिन्होंने नेतृत्व किया। इन नेताओं के एक खास गुट ने भ्रष्टाचार को इस कदर संस्थागत बना दिया है, जैसे कि लूट-खसोट करना उनका जन्मसिद्ध अधिकार हो।
सुखेंदु शेखर रॉय का यह बयान टीएमसी के लिए एक बड़े आंतरिक संकट की ओर इशारा कर रहा है। आरजी कर मामले पर अपनी ही सरकार के रवैए की आलोचना और शुभेंदु अधिकारी की तारीफ के बाद, अब बंगाल के राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है कि क्या टीएमसी के भीतर कोई बड़ा फेरबदल या बगावत होने वाली है।