पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 अपने सबसे निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। 29 अप्रैल को दूसरे और अंतिम चरण के लिए वोट डाले जाएंगे। राज्य के 8 जिलों की 142 सीटों पर होने वाला यह मतदान तय करेगा कि अगले पांच साल तक \’नवान्न\’ (सचिवालय) की कुर्सी पर किसका कब्जा होगा। इस फेज में करीब 1448 उम्मीदवारों की राजनीतिक किस्मत ईवीएम (EVM) में कैद होने जा रही है।
दूसरे चरण को राजनीतिक विश्लेषक \’डू ऑर डाई\’ (Do or Die) मान रहे हैं। विशेष रूप से दक्षिण 24 परगना, कोलकाता, हावड़ा और हुगली जैसे जिलों में मुकाबला बेहद दिलचस्प है। सबसे ज्यादा नजरें भवानीपुर सीट पर टिकी हैं, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी के बीच कड़ा मुकाबला बताया जा रहा है।
पहले चरण में हुई रिकॉर्ड वोटिंग (करीब 93%) के बाद बीजेपी के खेमे में जबरदस्त उत्साह है। पार्टी के रणनीतिकारों का दावा है कि पहले फेज के रुझान उनके पक्ष में हैं। वहीं, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि बंगाल की जनता केवल \’दीदी\’ के विकास कार्यों पर भरोसा करती है।
दक्षिण 24 परगना जिला इस बार फिर चर्चा में है। 2021 में यहाँ की 31 में से 30 सीटें टीएमसी ने जीती थीं, जिसे बचाए रखना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती है। बीजेपी इस बार दक्षिण बंगाल के शहरी इलाकों और गैर-बंगाली वोटरों के बीच अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश में है।
हिंसा के इतिहास को देखते हुए इस बार प्रशासन कोई ढील नहीं बरत रहा है। चुनाव आयोग ने मतदान से ठीक पहले कई अधिकारियों के तबादले किए हैं। सुरक्षा व्यवस्था ऐसी है कि परिंदा भी पर न मार सके। चप्पे-चप्पे पर केंद्रीय बलों की तैनाती की गई है।
क्या कल होने वाली वोटिंग पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ देगी? क्या 2021 की तरह टीएमसी अपना किला बचाने में सफल होगी, या बीजेपी बंगाल में नया इतिहास रचेगी? इन सभी सवालों के जवाब 4 मई को नतीजों के साथ साफ होंगे।