सस्पेंस, जासूसी और मौत का खेल: कैसे काम करती है ‘मोसाद’

इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद का नाम सुनते ही दिमाग में हाई-टेक गैजेट्स, खतरनाक मिशन और ‘टारगेटेड किलिंग्स’ की तस्वीरें घूमने लगती हैं। इसे दुनिया की सबसे घातक और प्रभावी खुफिया एजेंसियों में से एक माना जाता है। लेकिन आखिर मोसाद काम कैसे करती है और इसका इतिहास क्या है? आइए जानते हैं।

कल्पना कीजिए, आप एक खूंखार आतंकी हैं। आपने अपनी पहचान बदल ली है, आप दुनिया के किसी सुरक्षित कोने में एक आलीशान घर में रह रहे हैं। अचानक, एक दिन आपका फोन बजता है। जैसे ही आप फोन उठाते हैं, वह धमाके से उड़ जाता है। या फिर, आप अपनी कार में बैठते हैं और एक बिना नंबर वाली बाइक पास से गुजरती है और आपकी खिड़की पर एक ‘मैग्नेटिक बम’ चिपका कर गायब हो जाती है। यह किसी हॉलीवुड फिल्म का सीन नहीं है, बल्कि मोसाद के काम करने का तरीका है।

1949 में जब इजरायल अभी घुटनों पर चलना सीख रहा था, तब उसने एक ऐसी ‘आंख’ तैयार की जिसे दुनिया आज मोसाद के नाम से जानती है। इसका मकसद साफ था—दुनिया के किसी भी कोने में अगर इजरायल के खिलाफ साजिश रची गई, तो उसे वहीं दफन कर दिया जाएगा।

मोसाद की सबसे मशहूर कहानी 1960 की है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान लाखों यहूदियों की हत्या का मास्टरमाइंड एडोल्फ आइकमैन अर्जेंटीना में नाम बदलकर छिप गया था। मोसाद के एजेंटों ने उसे पहचाना, बीच सड़क से उसे किडनैप किया और नशे की दवा देकर एक बीमार क्रू मेंबर की तरह फ्लाइट में बिठाकर इजरायल ले आए। पूरी दुनिया देखती रह गई और आइकमैन को उसके किए की सजा मिली। यह ऑपरेशन मोसाद के ‘कभी न हारने’ वाले जज्बे का प्रतीक बन गया।

1972 के म्यूनिख ओलंपिक में फलस्तीनी आतंकियों ने इजरायली एथलीटों को मार डाला। इजरायल की तत्कालीन प्रधानमंत्री गोल्डा मेयर ने सिर्फ एक आदेश दिया— “उन सबको ढूंढो और खत्म करो।” अगले 20 सालों तक, मोसाद के एजेंटों ने यूरोप के अलग-अलग शहरों में उन आतंकियों को ढूंढा। किसी को उनके बिस्तर के नीचे बम लगाकर उड़ाया गया, तो किसी को सरेआम गोलियों से भून दिया गया। इस मिशन का नाम था ‘ऑपरेशन रैथ ऑफ गॉड’ मतलब ईश्वर का कहर।

मोसाद के भीतर एक छोटा सा ग्रुप है जिसे ‘किडोन’ (Kidon) कहा जाता है। हिब्रू भाषा में इसका मतलब होता है ‘खंजर की नोक’। ये वो जासूस हैं जिन्हें मारने की ट्रेनिंग दी जाती है। ये लोग किसी भी वेश में आ सकते हैं—एक प्रेमी जोड़ा, एक टूरिस्ट, या यहाँ तक कि एक डॉक्टर। इनकी खामोशी ही इनका सबसे बड़ा हथियार है।

हाल के वर्षों में, खासकर 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले ने मोसाद की साख पर सवाल खड़े किए हैं। जिस एजेंसी को ‘सब कुछ जानने वाली’ माना जाता था, वह अपने ही घर के पास हो रही साजिश को क्यों नहीं भांप पाई? यह विफलता आज भी दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों के लिए एक रहस्य बनी हुई है।

लेकिन जैसा कि इजरायल में कहा जाता है— “मोसाद कभी भूलती नहीं है।” हमास के साथ चल रही जंग और लेबनान में हालिया ‘पेजर धमाकों’ ने एक बार फिर साबित किया है कि मोसाद के पास ऐसे तरीके हैं जिनके बारे में आम इंसान सोच भी नहीं सकता। ईरान के साथ जो हुआ वो किसी से छिपा नहीं है। मोसाद का एक ही लक्ष्य होता है, अपने टार्गेट को मिट्टी में मिला देना।

मोसाद की दुनिया नैतिकता और कानून के बीच की धुंधली लकीर पर चलती है। उनके लिए न कोई बॉर्डर है, न कोई नियम। उनका सिर्फ एक ही कानून है—इजरायल के दुश्मनों से सिर्फ और सिर्फ इजरायल की सुरक्षा।

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