अधूरा रहा सिंदूर का वादा: सेहरा सजने से पहले लिपट गए तिरंगे में

नियति का खेल भी कितना क्रूर होता है, इसका गवाह हरियाणा का ककराना गांव बना। जहाँ कुछ दिनों बाद शहनाइयां गूंजने वाली थीं, वहां ‘भारत माता की जय’ और ‘शहीद अनुज अमर रहें’ के नारों के बीच हर आंख नम थी। असम में सुखोई-30 फाइटर प्लेन हादसे में शहीद हुए स्क्वाड्रन लीडर अनुज शर्मा पंचतत्व में विलीन हो गए।

शहीद अनुज शर्मा की शहादत की कहानी जितनी गौरवशाली है, उतनी ही हृदयविदारक भी। बताया जा रहा है कि अनुज का रिश्ता तय हो चुका था और घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं। नियति का संयोग देखिए कि उनकी होने वाली जीवनसंगिनी भी भारतीय वायुसेना में ही पायलट हैं। दोनों ने साथ मिलकर देश के आसमान की रक्षा का सपना देखा था, लेकिन सात फेरों से पहले ही अनुज ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दे दिया।

शहीद का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। अपने लाडले को अंतिम बार देखने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। अनुज के छोटे भाई मनुज, जो इंग्लैंड में नौकरी करते हैं, भाई की शहादत की खबर सुनकर तुरंत भारत लौटे। श्मशान घाट पर जब मनुज ने अपने बड़े भाई को मुखाग्नि दी, तो वहां मौजूद हर शख्स की रुलाई फूट पड़ी।

अनुज के रगों में देशभक्ति का जज्बा विरासत में मिला था। उनके पिता आनंद शर्मा भारतीय सेना में सूबेदार के पद से रिटायर हुए हैं। पिता की वर्दी को देखकर बड़े हुए अनुज का सपना हमेशा से आसमान छूने का था। साल 2015 में उनका चयन वायुसेना में हुआ और 2016 में जब वे ऑफिसर बनकर पहली बार गांव लौटे थे, तब पूरे ककराना ने पलक-पावड़े बिछाकर उनका स्वागत किया था। अब उसी गांव ने अपने नायक को नम आंखों से विदा किया।

अंतिम संस्कार के दौरान रोहतक के सांसद दीपेंद्र हुड्डा और हरियाणा सरकार के मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने भी शहीद को श्रद्धांजलि दी। मंत्री अरविंद शर्मा ने कहा अनुज की शहादत ने न केवल ककराना गांव, बल्कि पूरे हरियाणा का नाम ऊंचा किया है। देश इस वीर सपूत के बलिदान को कभी नहीं भूलेगा।

भारतीय वायुसेना के अनुसार, असम के जोरहाट एयरबेस से SU-30 MKI ने नियमित अभ्यास के लिए उड़ान भरी थी। विमान में स्क्वाड्रन लीडर अनुज वशिष्ठ और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरागकर सवार थे। एटीसी से संपर्क टूटने के बाद विमान कार्बी आंगलोंग के घने जंगलों में क्रैश हो गया। वायुसेना ने ‘X’ पर इस दुखद खबर की पुष्टि की।

आज अनुज शर्मा हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी वीरता की कहानी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। एक योद्धा, जिसने अपनी व्यक्तिगत खुशियों से ऊपर देश की सुरक्षा को रखा।

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