बिहार की राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि यहाँ की हवाएं पल-पल में रुख बदलती हैं, लेकिन पिछले 8 सालों में जिस नेता ने सबसे लंबी छलांग लगाई है, उनका नाम है सम्राट चौधरी। कभी राजद और जदयू के खेमे में अपनी पहचान तलाशने वाला यह नेता आज बिहार की सत्ता का वह ‘सम्राट’ बन चुका है, जिसके बिना बीजेपी का समीकरण अधूरा है। आइए जानते हैं, एक ‘दलबदलू’ की छवि से ‘सत्ता के शिखर’ तक पहुँचने के उनके सफर के 5 बड़े मोड़।
सम्राट चौधरी को राजनीति विरासत में मिली। वे बिहार के दिग्गज नेता शकुनी चौधरी के बेटे हैं, जो खुद कुशवाहा-कोइरी समाज के बड़े स्तंभ रहे। लेकिन सम्राट की चुनौती पिता की विरासत को सिर्फ संभालना नहीं, बल्कि उसे विस्तार देना था। 2014 में जब उन्होंने आरजेडी छोड़ी, तो यह केवल पार्टी बदलना नहीं, बल्कि लालू परिवार के वर्चस्व को चुनौती देना था।
आरजेडी छोड़ने के पीछे एक बड़ी वजह थी—तेजस्वी यादव का उभार। सम्राट चौधरी को यह आभास हो गया था कि आरजेडी में यादव-मुस्लिम (MY) समीकरण के सामने गैर-यादव ओबीसी नेताओं के लिए शीर्ष पर पहुंचने की जगह सीमित है। जहां भविष्य धुंधला हो, वहां से निकलना ही बुद्धिमानी है।” इसी सोच के साथ उन्होंने जदयू और मांझी की ‘हम’ (HAM) का सफर तय किया, लेकिन मंजिल अभी दूर थी।
जून 2017 में सम्राट चौधरी ने बीजेपी का दामन थामा। यह उनके जीवन का सबसे बड़ा जुआ था जो सही साबित हुआ। साल 2018 बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष बने। बीजेपी को एक ऐसे आक्रामक ओबीसी चेहरे की तलाश थी जो लालू-नीतीश की काट बन सके। सम्राट इस खांचे में फिट बैठ गए।
बिहार में कुशवाहा (कोइरी) समुदाय एक बड़ा वोट बैंक है। सम्राट ने इस बिखरे हुए वोट बैंक को एकजुट किया। बीजेपी ने समझा कि अगर बिहार में सत्ता पानी है, तो सवर्णों के साथ-साथ इस बड़े ओबीसी वर्ग को साधना होगा। सम्राट चौधरी इस ‘मिशन बिहार’ के पोस्टर बॉय बन गए।
सम्राट चौधरी की सबसे बड़ी ताकत उनका आक्रामक अंदाज है। वे विपक्ष पर तीखे हमले करने से नहीं चूकते। उनकी इसी शैली और जमीनी पकड़ ने उन्हें नरेंद्र मोदी और अमित शाह की टीम का चहेता बना दिया। आज वे जिस मुकाम पर हैं, वह उनकी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और बीजेपी की भविष्य की राजनीति का संगम है।
सम्राट चौधरी का सफर यह साबित करता है कि बिहार अब केवल पारंपरिक ‘यादव केंद्रित’ राजनीति तक सीमित नहीं है। गैर-यादव ओबीसी वर्गों की अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं और सम्राट चौधरी उसी नई लहर के प्रतिनिधि हैं।