Congress: बिहार में कांग्रेस का ‘मिशन 90’…. चुनावी मैदान में उतरे 58 चुनावी ‘योद्धा’,

Congress In Hindi : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियों को लेकर कांग्रेस पार्टी ने अपनी रणनीति को और मजबूत करते हुए 58 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। यह कदम पार्टी के संगठन को सशक्त बनाने और आगामी चुनाव में प्रभावी प्रदर्शन सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इन पर्यवेक्षकों की नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से मंजूरी दी है। इन 58 पर्यवेक्षकों को विधानसभा क्षेत्रों के हिसाब से जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। इनका मुख्य फोकस बूथ मैनेजमेंट को बेहतर करना, स्थानीय कार्यकर्ताओं को एकजुट करना, और कांग्रेस प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के लिए जमीनी स्तर पर काम करना होगा।

बिहार में कांग्रेस ने तेज की चुनावी तैयारियां

पर्यवेक्षकों की सूची में अनुभवी नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं का मिश्रण शामिल है, जैसे रिटायर्ड विंग कमांडर अनुमा आचार्य, अंबा प्रसाद, अली मेहंदी, अशोक चांदना, मनोज यादव, नदीम जावेद, शोएब खान, अखिलेश यादव, और वीरेंद्र यादव। कांग्रेस बिहार में महागठबंधन के हिस्से के रूप में चुनाव लड़ रही है। पार्टी का लक्ष्य अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के साथ-साथ युवा, महिला, और ग्रामीण मतदाताओं पर विशेष ध्यान देना है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस इस बार लगभग 90 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है, जो 2020 के चुनाव में लड़ी गई 70 सीटों से अधिक है।

कांग्रेस ने नियुक्त किए 58 पर्यवेक्षक

पर्यवेक्षकों का चयन उनके पिछले चुनावी अनुभव और सांगठनिक क्षमता को ध्यान में रखकर किया गया है। ये नेता बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक संगठन को मजबूत करने और स्थानीय फीडबैक इकट्ठा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कांग्रेस ने अपनी पसंद की सीटों पर चुनाव लड़ने का स्पष्ट संदेश दिया है, जिससे महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पार्टी की कोशिश है कि वह गठबंधन के प्रमुख घटक दलों, खासकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD), के साथ बेहतर तालमेल बनाए।

बिहार में सियासी हलचल तेज

बिहार में इस साल अक्टूबर-नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सियासी हलचल तेज हो गई है। 2020 के चुनाव में कांग्रेस ने महागठबंधन के तहत 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन इस बार पार्टी अधिक सीटों पर दावेदारी कर रही है। राहुल गांधी समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने हाल के महीनों में बिहार का दौरा कर संगठन को सक्रिय करने और जनता से जुड़ने की कोशिश की है।

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