उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक निजी अस्पताल की संवेदनहीनता और ठगी का ऐसा अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई दंग है। एक नामी अस्पताल पर आरोप है कि उसने इलाज कराने आए एक बुजुर्ग को \’एड्स\’ (HIV+) होने का झूठा डर दिखाया और उनके परिवार से इलाज के नाम पर लाखों रुपये ऐंठ लिए।
अस्पताल की इस झूठी रिपोर्ट के कारण न सिर्फ परिवार कंगाल हुआ, बल्कि समाज और रिश्तेदारों ने भी बुजुर्ग से दूरी बना ली। जब हकीकत सामने आई, तो परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। दरअसल, यह पूरा मामला बागपत के रहने वाले बुजुर्ग मोहम्मद से जुड़ा है। उन्हें सांस लेने में तकलीफ थी।
परिजनों ने पहले उन्हें बड़ौत के एक अस्पताल में दिखाया, जहां से उन्हें मेरठ रेफर कर दिया गया। मेरठ के शीला अस्पताल में बुजुर्ग को भर्ती कराया गया। आरोप है कि डॉक्टरों ने इलाज के दौरान परिजनों को बताया कि बुजुर्ग को एड्स (HIV) जैसी गंभीर बीमारी है।
जैसे ही \’एड्स\’ की बात सामने आई, पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। लोक-लाज के डर से सगे-संबंधियों और रिश्तेदारों ने बुजुर्ग से दूरी बना ली। इधर, अस्पताल प्रशासन बीमारी का खौफ दिखाकर इलाज के नाम पर लाखों रुपये वसूलता रहा।
लगातार भारी-भरकम बिल और मरीज की हालत देखकर परिजन परेशान हो गए। उन्होंने हिम्मत जुटाकर बुजुर्ग को अस्पताल से डिस्चार्ज कराया और तसल्ली के लिए एक प्रतिष्ठित प्राइवेट लैब से दोबारा एचआईवी (HIV) टेस्ट करवाया। जब रिपोर्ट आई तो सब हैरान रह गए—बुजुर्ग की रिपोर्ट पूरी तरह से \’नेगेटिव\’ थी। इसके बाद परिवार ने कई और जांचें भी कराईं, जिनमें एड्स न होने की पुष्टि हुई। तब जाकर परिवार को समझ आया कि उन्हें मेडिकल माफिया के जाल में फंसाकर लूटा गया है।
अस्पताल की इस बड़ी धोखाधड़ी और मानसिक उत्पीड़न के खिलाफ पीड़ित परिवार ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।परिजनों ने मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) से मुलाकात कर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई और इंसाफ की गुहार लगाई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमओ ने तुरंत जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की एक टीम इस मामले की बारीकी से जांच कर रही है। अगर अस्पताल पर लगे आरोप सही पाए जाते हैं, तो अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने से लेकर एफआईआर (FIR) दर्ज कराने तक की सख्त कार्रवाई की जाएगी।