Bengal Violence : पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन की उठी मांग, बंगाल हिंसा पर SC की सुनवाई

Supreme Court On Bengal Violence : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका पर प्रतिक्रिया दी जिसमें पश्चिम बंगाल में हुए राष्ट्रपति शासन की मांग की गई थी। याचिका सुनवाई के दौरान सीनियर जज बीआर गवई ने टिप्पणी करते हुए “क्या हम राष्ट्रपति को राष्ट्रपति शासन लगाने का आदेश दें?” दरअसल पश्चिम बंगाल के निवासी देवदत्त माजी और मणि मुंजाल ने इस महीने वक्फ या इस्लामी धर्मार्थ बंदोबस्त के विनियमन और प्रबंधन के लिए नए कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बाद हिंदुओं पर कथित हमलों का हवाला देते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन की मांग की।

‘सरकार के कामकाज में दखल के आरोप’ 

जस्टिस भूषण रामाकृष्ण गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच के सामने ये मांग रखी गई। हालांकि इस पर जस्टिस गवई ने कहा कि “मामले की सुनवाई के दौरान वह अपनी बात रखें।” न्यायपालिका पर सरकार के कामकाज में दखल का आरोप लगाते हुए चल रही बयानबाजी की तरफ इशारा करते हुइ सीनीयर जज बीआर गवई ने टिप्पणी की, “वैसे भी हम पर पहले ही कार्यपालिका के क्षेत्र में दखल देने का आरोप लग रह रहा है।” आप चाहते हैं हम कि राष्ट्रपति को निर्देश दें?’ यह टिप्पणी वकील विष्णु शंकर जैन की ओर से दायर उस याचिका पर आई, जिसमें वक्फ संशोधन कानून को लेकर पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा का हवाला देते हुए राष्ट्रपति शासन की मांग की।

बंगाल में राष्ट्रपति शासन की मांग

विष्णु शंकर जैन ने कहा, ‘कल की सूची में मद संख्या 42 पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने से संबंधित है हालांकि, यह याचिका मैंने दायर की है। उस याचिका में मैंने बंगाल राज्य में हुई हिंसा की कुछ और घटनाओं को सामने लाने संबंधी अभियोग और निर्देश के लिए एक इंटरलोक्यूटरी आवेदन दायर किया है।’ इंटरलोक्यूटरी आवेदन एक औपचारिक कानूनी अनुरोध होता है, जो अंतरिम आदेश या निर्देश प्राप्त करने के लिए कोर्ट की कार्यवाही के दौरान दायर किया जाता है।

क्या है अनुच्छेद 355, जिसकी जैन ने की मांग?

जैन द्वारा 2021 के मामले का हवाला दिए जाने के बाद पीठ ने माजी और मुंजाल की याचिका को सूचीबद्ध करने की अनुमति दे दी। जैन ने कहा, “हम केवल राज्य से संविधान के अनुच्छेद 355 के तहत एक रिपोर्ट चाहते हैं।” अनुच्छेद 355 में केंद्र सरकार के कर्तव्य के बारे में बताया गया है कि वह राज्यों को बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति से बचाए, जो राष्ट्रपति शासन का आधार है। इस प्रावधान के तहत केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करना होता है कि राज्य संविधान के अनुसार चले।

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