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क्या आप जानते हैं बिहार के इस कद्दावर नेता के उदय की इनसाइड स्टोरी?

बिहार की राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि यहाँ की हवाएं पल-पल में रुख बदलती हैं, लेकिन पिछले 8 सालों में जिस नेता ने सबसे लंबी छलांग लगाई है, उनका नाम है सम्राट चौधरी। कभी राजद और जदयू के खेमे में अपनी पहचान तलाशने वाला यह नेता आज बिहार की सत्ता का वह ‘सम्राट’ […]

मोकामा के ‘छोटे सरकार’ की जेल से वापसी, मिली जमानत

बिहार की सियासत और अपराध की गलियों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मोकामा के बाहुबली पूर्व विधायक अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। चर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड में कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है। इस फैसले के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि

सम्राट चौधरी होंगे अगले CM? नीतीश कुमार ने दिया बड़ा संकेत!

बिहार की राजनीति में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान जमुई के मंच से एक ऐसा इशारा किया, जिसने सत्ता के गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। मंच पर नीतीश कुमार ने न केवल उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखा,

बिहार का अगला ‘किंग’ कौन? 36% EBC आबादी का असली सस्पेंस!

बिहार की सियासी फिजाओं में इन दिनों एक ही सवाल तैर रहा है— ‘नीतीश कुमार के बाद कौन?’ मुख्यमंत्री आवास की कुर्सी को लेकर चर्चाएं अब केवल राजनीतिक गलियारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि गांव की चौपालों से लेकर शहर की चाय की दुकानों तक, जनता अपने-अपने मुख्यमंत्री चुन रही है। बिहार की राजनीति जिस

निशांत ने थामी JDU की कमान, पिता से आशीर्वाद लेकर शुरू की नई पारी

बिहार की सत्ता के गलियारों से एक ऐसी खबर आई है जिसने राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया है। वर्षों तक परिवारवाद की राजनीति से दूरी बनाए रखने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार आखिरकार सक्रिय राजनीति का हिस्सा बन गए हैं। निशांत ने आधिकारिक तौर पर जनता दल यूनाइटेड (JDU) की सदस्यता ग्रहण

बिहार का नया ‘सुल्तान’: क्या शाहनवाज हुसैन बदलेंगे 2026 का क्लाइमेक्स?

बिहार की राजनीति इस वक्त एक ऐसे चौराहे पर खड़ी है जहाँ ‘सुशासन बाबू’ की विरासत को संभालने के लिए भाजपा एक नए और सर्वमान्य चेहरे की तलाश में है। सम्राट चौधरी से लेकर नित्यानंद राय तक कई दिग्गज कतार में हैं, लेकिन गलियारों में एक नाम की गूंज सबसे अलग है— सैयद शाहनवाज हुसैन।

‘सुशासन बाबू’ से ‘पलटू बाबू’ तक, बिहार की राजनीति के 20 साल

बिहार की राजनीति के क्षितिज पर पिछले दो दशकों से एक ही नाम छाया रहा— नीतीश कुमार। साल 2005 के 24 नवंबर को जब उन्होंने पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता संभाली थी, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह ‘इंजीनियर’ बिहार के इतिहास की सबसे लंबी राजनीतिक पारी खेलने जा रहा है।

कैसे ‘छोटे भाई’ से ‘किंगमेकर’ और फिर ‘किंग’ बन गई भाजपा?

भारतीय राजनीति के बिसात पर पिछले एक दशक में अगर कुछ सबसे तेजी से बदला है, तो वह है भाजपा का अपने सहयोगियों के साथ समीकरण। कभी क्षेत्रीय क्षेत्रिय पार्टियों के पीछे चलने वाली भारतीय जनता पार्टी अब ‘ड्राइविंग सीट’ पर है। राज्यसभा चुनाव के लिए विनोद तावड़े, रामदास आठवले, रामराव वडकुते और माया इवनाते

मिशन दिल्ली: क्या नीतीश बनेंगे देश के नए ‘चाणक्य’?

बिहार के अजेय मुख्यमंत्री, ‘साहब’ अचानक राज्यसभा जाने का फैसला करते हैं, जिससे एक भीषण सत्ता संघर्ष शुरू हो जाता है। एक तरफ बीजेपी अपना मुख्यमंत्री चाहती है, दूसरी तरफ ‘साहब’ अपने निशांत बेटे को राजनीति में उतारकर अपनी विरासत बचाना चाहते हैं, और तीसरी तरफ विपक्ष इस टूट का फायदा उठाने के लिए तैयार

महापरिवर्तन: क्या नीतीश का ‘राज्याभिषेक’ दिल्ली में होगा?

बिहार की सियासत में इन दिनों वह खामोशी है, जो किसी बड़े तूफान के आने से पहले महसूस होती है। करीब ढाई दशकों तक बिहार की सत्ता के धुरी बने रहे नीतीश कुमार अब ‘किंग’ की भूमिका छोड़कर ‘किंगमेकर’ या मार्गदर्शक की भूमिका में नजर आ सकते हैं।पटना के गलियारों से छनकर आ रही खबरों

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