Madhya Pradesh : भिंड में डाकू बनी पुलिस… SP ने चाय पर बुलाया, फिर चप्पलों से कर दी पत्रकारों की पिटाई, क्या सच छापने की मिली सजा ?

Madhya-Pradesh News : मध्यप्रदेश के भिंड से एक ऐसी घटना सामने आई जिसे सुन हर कोई हैरान रह गया। जहां एक तरफ भाजपा का शासन सुशासन और शांति के लिए जाना जाता है। लेकिन मध्यप्रदेश में तो कुछ अलग ही तस्वीर नजर आ रही है। भाजपा की पुलिस खुद शांति व्यवस्था से खिलवाड़ करती हुई नजर आ रही है। पुलिस को जान का रक्षक कहा जाता है, लेकिन अगर वहीं लोगों की जान के दुश्मन बन जाए, तो क्या किया जाए। मध्यप्रदेश के भिंड जिले की हकीकत भी कुछ ऐसी ही नजर आ रही है। एक तरफ पुलिस है तो एक तरफ मीडिया यानी देश का चौथा और मजबूत स्तंभ। मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार है।

भिंड की तानाशाह पुलिस

भिंड जिले में कुछ दिन पहले तीन स्थानीय डिजिटल मीडिया के पत्रकारों ने पुलिस अधीक्षक असित यादव पर कई गंभीर आरोप लगाए है। पत्रकार प्रीतम सिंह राजावत (यूट्यूब पत्रकार), शशिकांत गोयल (लोकल न्यूज़ चैनल) और अमरकांत चौहान (डिजिटल मीडिया) इनका दावा है कि 1 मई को इलाके के एसपी साहब ने उन्हें एक-एक कर के अलग-अलग समय पर अपने दफ्तर में बुलाया। पहुंचने पर पुलिस के खिलाफ खबरें चलाने के लिए पत्रकारों के साथ गाली-गलोज करने लगे। यहां तक तो फिर भी ठीक था। लेकिन गाली-गलोज करने के बाद पत्रकारों को थप्पड़ मारने से लेकर चप्पलों से पिटाई की गई। पुलिस ने पत्रकारों को सच छापने की सजा दी। मध्य-प्रदेश और भिंड के एसपी साहब चाहते हैं कि सभी पत्रकार उनके मुताबिक खबरे चलाएं। उनका प्रशंसा में खबरे चलाए, लेकिन ऐसा होने से रहा। पत्रकार पूरी स्वतंत्रता से लोगों तक पारदर्शिता के साथ खबरे चलाएंगे। इस मुहिम में भिंड के पत्रकारों के साथ देश का हर पत्रकार है।

पत्रकारों से की पुलिस ने मारपीट

बता दें कि इस घटना को करीब 5 दिन बीत चुके हैं, लेकिन इस मामले पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं का गई है। इन पत्रकारों ने देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को पत्र लिखकर न्याय की मांग की है। कांग्रेस मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष ने इस मामले पर अपने सोशल मीडिय प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर लिखा “भिंड में पत्रकार शशिकांत गोयल (दलित) को चप्पलों से पीटा,दूसरे अमरकांत चौहान ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर कहा है कि अगर बुधवार तक उन्हें न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या कर लेंगे। मोहन यादव जी इस घटना को चार दिन होने जा रहे हैं आपने अब तक इसका संज्ञान क्यों नहीं लिया? कारवाई कब?”

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर हुई घटना 

बता दें कि यह घटना विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हुई। लेकिन इस मामले पर तमाम नेता, भाजपा और दिल्ली की तमाम बड़े मीडिया चैनलों ने इस घटना पर मौत व्रत रखा है। इन पत्रकारों का कुसूर सिर्फ इतना था कि इन्होंने अपने न्यूज़ चैनलों में अवैध रेत खनन और वसूली जैसी खबर पूरे सच के साथ चलाई थी। जिसके बाद से भिंड पुलिस प्रशासन पत्रकारों से खफा है। पत्रकारों को चाय पर बुलाकर इनका चप्पलों से स्वागत किया गया। शायद यह भाजपा और भिंड की पुलिस की परंपरा है। लेकिन आजादी के 75 वर्ष बीत जाने के बाद भी पत्रकार सच जनता तक नहीं पहुंचा सकता है। तो यह आजादी किस काम की। भिंड की घमंडी पुलिस अपने आपको इलाके की राजा मान रही है और निरंकुश शासन करना चाहती है। लेकिन हम सब मिलकर पत्रकारों के न्याय दिलाने की पूरजोर कोशिश कर रहे हैं।

सच दिखाने कि मिली सजा 

इन पत्रकारों का कहना है कि उन्हें कभी भी जितना चंबल के डाकुओं से डर नहीं लगा, उससे अधिक भिंड की पुलिस से है। किसी भी समाज के लिए पत्रकार एक आत्मा का काम करते हैं। वह सरकार और जनता के बीच का पुल होते हैं। संविधान की रक्षा और उस पर अमल करने के लिए व्यवस्थापिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका को जिम्मेदार हैं। पत्रकारिता उस चौथे स्तंभ के तौर पर काम करती है, जिसकी बुलंद आवाज के बाद ही अक्सर तीनों स्तंभ ज्यादा मुस्तैदी से अपना कर्तव्यों का पालन करने के लिए प्रेरित करती है।

 

 

 

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