राष्ट्र के नाम संबोधन से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु की धरती से महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष पर तीखा हमला बोला। एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने न केवल अपना दर्द साझा किया, बल्कि यह भी बताया कि कैसे राजनीतिक खींचतान के कारण साधारण परिवार की महिलाओं का हक उनसे दूर रखा गया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वह राजनीति से ऊपर उठकर महिलाओं को सशक्त देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “मैंने विपक्ष से साफ-साफ कहा था कि वे इसका श्रेय ले सकते हैं, मुझे तो बस साधारण परिवार की बहनों को संसद और विधानसभा में देखना अच्छा लगता है।” पीएम ने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता केवल देश की नारी शक्ति को नेतृत्व की भूमिका में लाना है।
प्रधानमंत्री ने संसद में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का जिक्र करते हुए विपक्षी गठबंधन (I.N.D.I.A.) को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा दुर्भाग्यवश, इन नेक प्रयासों में देरी हुई। डीएमके, कांग्रेस और उनके सहयोगियों ने इस विधेयक को नफ़रत का निशाना बनाया। अगर यह विधेयक पहले ही पारित हो गया होता, तो साधारण परिवारों की कई तमिल महिलाएँ आज सांसद और विधायक बन गई होतीं।
पीएम मोदी ने याद दिलाया कि सितंबर 2023 में उनकी सरकार ने ‘नारी शक्ति अधिनियम’ पारित किया और इस महीने की 16 तारीख को इसे लागू करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे एकजुट होकर इसका समर्थन करें ताकि भविष्य में और अधिक महिलाएं नीति-निर्धारण का हिस्सा बन सकें।